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पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बने सचिन पायलट, 2027 चुनाव से पहले संगठन को साधने की चुनौती

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह राजस्थान के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए पंजाब में कांग्रेस की सत्ता में वापसी का भरोसा जताया।

पायलट ने नेतृत्व का जताया आभार

सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आभार जताया।

उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं। पायलट ने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर पंजाब में कांग्रेस को फिर सत्ता में लाने का संकल्प जताया।

उनके मुताबिक, सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की मेहनत के जरिए पार्टी पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

छह महासचिवों की जिम्मेदारियों में बदलाव

कांग्रेस ने शनिवार को छह महासचिवों के प्रभार में बदलाव किया। इसी फेरबदल के तहत सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है।

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बने सचिन पायलट, 2027 चुनाव से पहले संगठन को साधने की चुनौती

अब तक पंजाब के प्रभारी रहे भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया है। वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. श्रीविला प्रसाद को महाराष्ट्र और वीपी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

सुरजेवाला के पास गुजरात के साथ कर्नाटक का प्रभार भी रहेगा।

2027 चुनाव से पहले बड़ी चुनौती

पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को चुनाव से पहले एकजुट करने की होगी।

हाल के संगठनात्मक बदलावों के बाद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा तेज हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के समर्थकों के बीच मतभेद सार्वजनिक तौर पर भी सामने आए हैं।

भूपेश बघेल की बैठकों से नहीं बनी बात?

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रहते भूपेश बघेल ने राज्य के नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी नेताओं के बीच समन्वय बनाने की कोशिश की गई, लेकिन गुटों के बीच पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई।

अब कांग्रेस ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाकर संगठन के सामने एक नई रणनीतिक चुनौती रखी है। पार्टी की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले नेताओं के बीच मतभेद कम हों और संगठन का फोकस सरकार विरोधी मुद्दों तथा जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर रहे।

राजा वडिंग और चन्नी के बीच संतुलन की परीक्षा

सचिन पायलट के लिए पंजाब की चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें प्रदेश नेतृत्व के अलग-अलग धड़ों के बीच संतुलन बनाना होगा।

राजा वडिंग को पायलट का करीबी माना जाता है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पायलट प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक दूरी कम करने में कितने सफल होते हैं।

कांग्रेस की सत्ता में वापसी का लक्ष्य

सचिन पायलट ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में साफ कर दिया है कि उनका लक्ष्य पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करना और सत्ता में वापसी के लिए संगठन को तैयार करना है।

अब 2027 के चुनाव तक उनके सामने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, गुटबाजी कम करने, स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान से जोड़ने और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती होगी। पंजाब में कांग्रेस की चुनावी दिशा काफी हद तक इस संगठनात्मक रणनीति की सफलता पर निर्भर कर सकती है।

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