
लद्दाख के चीफ सेक्रेटरी आशीष कुंद्रा ने पुष्टि की है कि गृह मंत्रालय (MHA) की सब-कमेटी की बैठक 9 सितंबर को तय की गई है। बैठक में लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों पर चर्चा होने की संभावना है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब लद्दाख के प्रमुख संगठनों ने अपनी कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
कारगिल से लेह तक पदयात्रा का ऐलान
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करने और अन्य मांगों को लेकर कारगिल से लेह तक पदयात्रा करने की घोषणा की है।
वहीं लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और KDA लंबे समय से लद्दाख को अधिक राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक अधिकार देने की मांग उठा रहे हैं।
दोनों संगठनों का कहना है कि लद्दाख के भविष्य को लेकर होने वाली बातचीत में स्थानीय लोगों की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची प्रमुख मांग
लद्दाख के संगठनों की प्रमुख मांगों में पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करना शामिल है। इसके अलावा संवैधानिक सुरक्षा की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।
संगठनों ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली विधानसभा के गठन, लोक सेवा आयोग की स्थापना और लेह तथा कारगिल के लिए एक-एक लोकसभा सीट की मांग भी रखी है।
इसके साथ ही 24 सितंबर की हिंसा से जुड़े 87 मामलों को बिना शर्त वापस लेने की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

22 मई की बातचीत में बनी थी सैद्धांतिक सहमति
केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच 22 मई को हुई बातचीत में निर्वाचित निकाय को कार्यकारी, विधायी और वित्तीय अधिकार देने तथा अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी।
इसके बाद 3 जुलाई को लेह में हुई बैठक में इस संबंध में कार्यवाही पर हस्ताक्षर भी किए गए थे। अब नई बैठक में आगे की प्रक्रिया और लंबित मांगों पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
19 अगस्त की बैठक के बाद बढ़ी बातचीत
9 सितंबर की बैठक का रास्ता 19 अगस्त को लेह में हुई बैठक के बाद साफ हुआ। उस बैठक में गृह मंत्रालय की टीम ने LAB और KDA के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी।
इस दौरान लद्दाख के संगठनों ने अपनी कई मांगों को ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी मांगें बताया था जिन पर वे समझौता नहीं करना चाहते।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर केंद्रित है बातचीत
LAB और KDA की मांगों में निर्वाचित विधानसभा के साथ वित्त और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारों पर अधिक नियंत्रण, अलग लोक सेवा आयोग और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
लद्दाख के मुख्य सचिव ने इसे क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए चल रही बातचीत का हिस्सा बताया है।
अब 9 सितंबर की बैठक पर सबकी नजर है। एक तरफ लद्दाख के संगठन अपनी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट रुख बनाए हुए हैं, वहीं केंद्र के साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आगामी बैठक यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति का दायरा कितना आगे बढ़ता है।
