जयशंकर अचानक पहुंचे कीव, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत ने दिया शांति का संदेश

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति में भारत की सक्रियता बढ़ती दिख रही है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध समाप्त कर शांति का रास्ता तलाशने पर जोर दिया, तो दूसरी ओर विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। यहां उन्होंने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की भारत की नीति दोहराई।
अचानक कीव पहुंचे विदेश मंत्री
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर यूक्रेन के दौरे पर कीव पहुंचे हैं। यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष लगातार गंभीर बना हुआ है।
कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने युद्ध के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है और भारत लंबे समय से मानता रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं होना चाहिए।
‘समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा’
जयशंकर ने कहा कि भारत का स्पष्ट मत रहा है कि युद्ध के मैदान से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। उनके मुताबिक, संघर्ष का हर गुजरता दिन और ज्यादा मौत और विनाश लेकर आता है।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध में शामिल पक्षों को ही समाधान का रास्ता तलाशना होगा। हालांकि, यदि भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है।

भारत का यह रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संदेश से भी जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध के बजाय संघर्ष को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया था।
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने किया स्वागत
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने जयशंकर के कीव पहुंचने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण यात्रा बताते हुए कहा कि यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है।
इस दौरे को दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पोलैंड के मंत्री से भी बातचीत
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर की यात्रा के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के अलावा पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत हो रही है।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य भारत-यूक्रेन संबंधों को मजबूत करना है। इसके साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रम और दोनों पक्षों के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया जा रहा है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी अहम
जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब ब्लैक सी क्षेत्र में रूस और यूक्रेन के बीच तनाव के दौरान भारतीय नाविकों की मौत और घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं।
नई दिल्ली ने भारतीय नागरिकों और दूसरे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके साथ ही भारत ने युद्ध को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाप्त करने की अपील भी दोहराई है।
रूस से भी शांति की अपील
एक तरफ जयशंकर की कीव यात्रा भारत के यूक्रेन के साथ संवाद को दिखाती है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी रूस के साथ भी लगातार संपर्क में रहे हैं। भारत का संदेश रहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
यही संतुलित कूटनीति भारत को रूस और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों के बीच संवाद बनाए रखने में मदद करती है।
भारत की कूटनीति पर दुनिया की नजर
रूस-यूक्रेन युद्ध के पांचवें वर्ष में प्रवेश के बीच जयशंकर की कीव यात्रा का महत्व बढ़ जाता है। भारत एक ओर रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को बनाए रख रहा है, वहीं यूक्रेन के साथ भी सीधा संवाद जारी रखे हुए है।
भारत का संदेश साफ है—युद्ध चाहे जितना लंबा चले, स्थायी समाधान का रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा। अब निगाह इस बात पर है कि कीव में हुई बातचीत भारत-यूक्रेन संबंधों और शांति प्रयासों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
