हिसार में किसान-मजदूरों ने सांसद-विधायकों को सौंपा ज्ञापन, MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगें

राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हिसार में रविवार को किसान और मजदूर मान पार्क में जुटे। प्रदर्शनकारियों ने सांसद और विधायकों को ज्ञापन सौंपकर सभी फसलों पर C2+50% के आधार पर कानूनी MSP और खरीद की गारंटी समेत कई मांगें उठाईं। मांगें पूरी नहीं होने पर 26 नवंबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई।
मान पार्क में जुटे किसान-मजदूर
रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा के किसान-मजदूर क्रांतिकारी मान पार्क में एकत्र हुए। इस दौरान किसानों और मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई।
इसके बाद हिसार सांसद जयप्रकाश जेपी, नलवा विधायक रणधीर पनिहार, बरवाला विधायक रणबीर गंगवा और हिसार विधायक सावित्री जिंदल को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कृषि, मजदूरों, बिजली, भूमि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे शामिल किए गए।
C2+50% MSP और कर्जमाफी की मांग
मोर्चा नेताओं ने सभी फसलों के लिए C2+50% की दर से कानूनी MSP और फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी देने की मांग की। इसके अलावा किसानों और मजदूरों की व्यापक कर्जमाफी की मांग भी रखी गई।
आंदोलनकारियों ने आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना है कि कृषि संकट से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध
किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका FTA समेत सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि ऐसे समझौतों का असर किसानों और घरेलू कृषि बाजार पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही लोकतांत्रिक अधिकारों और आंदोलन के अधिकार पर कथित दमन बंद करने तथा धर्म के नाम पर नफरत और विभाजन की राजनीति समाप्त करने की मांग की गई।

26 नवंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो 26 नवंबर से विशाल और निरंतर देशव्यापी किसान संघर्ष दोबारा शुरू किया जाएगा।
नेताओं ने इसे किसानों और मजदूरों के विभिन्न मुद्दों को लेकर व्यापक आंदोलन की अगली कड़ी बताया और सरकार से मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की।
मजदूरों के लिए भी कई मांगें
ज्ञापन में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 31 हजार रुपये प्रति माह करने की मांग रखी गई। इसके अलावा मनरेगा में 200 दिन काम और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग भी शामिल रही।
किसान-मजदूर संगठनों ने बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने, बीज विधेयक वापस लेने और जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग की। साथ ही किसानों, आदिवासियों और वनवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग भी उठाई गई।
सामाजिक सुरक्षा और राज्यों के अधिकारों पर जोर
आंदोलनकारियों ने किसानों और मजदूरों के लिए 10 हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मांग भी रखी। इसके अलावा राज्यों के संघीय अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता मजबूत करने की बात कही गई।
ज्ञापन में विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग भी शामिल रही। मोर्चा नेताओं ने कहा कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलने से विकास और कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
8 सितंबर को पुलिस अधीक्षक से मिलेंगे प्रतिनिधि
संयुक्त किसान मोर्चा हिसार के प्रतिनिधि 8 सितंबर को पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेंगे। इस दौरान सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान महिला सफाई कर्मियों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार का मुद्दा उठाया जाएगा।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि वे मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
बड़ी संख्या में किसान-मजदूर रहे मौजूद
कार्यक्रम में शमशेर सिंह नंबरदार, सरदानंद राजली, राजीव मलिक, ईश्वर वर्मा बाडोपट्टी, अनिल बैंदा, सतपाल शर्मा, सुरेंद्र मान, देवेंद्र सिंह लौरा, साधुराम, ओमप्रकाश लाडवा, रोशन लाल, सुबेर सिंह, राममेहर लाडवा, पप्पू मिस्त्री, महेंद्र बैंदा और सुभाष जांगू सहित कई किसान-मजदूर मौजूद रहे।
हिसार में हुए इस कार्यक्रम के जरिए किसान-मजदूर संगठनों ने एक बार फिर MSP, कर्जमाफी, मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। अब 8 सितंबर की पुलिस अधीक्षक के साथ प्रस्तावित मुलाकात और 26 नवंबर की आंदोलन की चेतावनी पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
