
पंजाब के जीरकपुर में बुधवार सुबह हुई स्नैचिंग की वारदात ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरनैल एंक्लेव में करीब 10:30 बजे दो युवकों ने व्हीलचेयर पर जा रहे दिव्यांग सुरेंद्र पाल को निशाना बनाया। आरोपियों ने उनका पर्स छीना और तेजी से फरार हो गए।
पर्स में नकदी से लेकर जरूरी दस्तावेज
बताया जा रहा है कि सुरेंद्र पाल के पर्स में करीब 4 से 5 हजार रुपये नकद थे। इसके अलावा मोबाइल फोन, ब्लूटूथ हेडफोन, क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे जरूरी सामान भी रखे थे। अचानक हुई इस घटना से पीड़ित को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चिंता भी सताने लगी।
हिम्मत नहीं हारी, व्हीलचेयर से किया पीछा
स्नैचिंग के बाद सुरेंद्र पाल ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने शोर मचाया और व्हीलचेयर पर ही दोनों आरोपियों का पीछा करने की कोशिश की। हालांकि, आरोपी इतनी तेजी से भागे कि वह उन्हें पकड़ नहीं सके। इस घटना में पीड़ित का साहस लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

CCTV में कैद हुई वारदात
पूरी घटना इलाके में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। बताया जा रहा है कि फुटेज में दोनों संदिग्धों के चेहरे भी स्पष्ट नजर आ रहे हैं। ऐसे में पुलिस के पास आरोपियों की पहचान करने के लिए अहम सुराग मौजूद है। अब जांच टीम CCTV फुटेज के आधार पर उनकी पहचान और संभावित भागने के रास्तों का पता लगाने में जुटी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
रिहायशी इलाके में दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का सवाल है कि जब एक दिव्यांग व्यक्ति भी सड़क पर सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कितनी मजबूत है। स्थानीय लोगों ने इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत जताई है।
तीन दिव्यांग बेटियों का संघर्ष भी सामने आया
दिव्यांग लोगों की मुश्किलें केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। ओडिशा के क्योंझर जिले से सामने आई एक दूसरी तस्वीर भी ऐसे परिवारों की चुनौतियां दिखाती है। घुंघी गांव में नटबर जुआंग और उनकी पत्नी कुंद जुआंग अपनी तीन दिव्यांग बेटियों के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं।
परिवार के पास खेती की जमीन और नियमित आय का साधन नहीं है। उम्र बढ़ने के कारण माता-पिता के लिए मजदूरी करना भी मुश्किल हो गया है। परिवार सरकारी मदद और 35 किलो मुफ्त चावल पर निर्भर है। तीनों बेटियां चलने-फिरने में असमर्थ हैं, जिससे इलाज, शिक्षा और जरूरी कामों के लिए बाहर जाना बेहद कठिन है।
सवाल सिर्फ सुरक्षा का नहीं, सम्मान का भी
जीरकपुर की घटना और ओडिशा के परिवार की कहानी अलग-अलग परिस्थितियां हैं, लेकिन दोनों एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखती हैं—दिव्यांग नागरिकों के लिए समाज और व्यवस्था कितनी संवेदनशील है? सुरक्षा, आवागमन और सरकारी सहायता उनके अधिकार हैं, एहसान नहीं। अब जीरकपुर पुलिस के सामने चुनौती है कि CCTV के आधार पर आरोपियों को जल्द पकड़े और छीना गया सामान बरामद करे।
