ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर को रिमोट से बंद करने वाले 3 ऐप्स पर सरकार का बड़ा एक्शन

इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कथित तौर पर ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर को रिमोट से डिसेबल करने में इस्तेमाल हो रहे तीन मोबाइल ऐप्स को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और ईवी चालकों की आजीविका की रक्षा करना है।
किन ऐप्स पर हुई कार्रवाई?
सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion नामक तीन मोबाइल एप्लिकेशनों को विभिन्न ऐप स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि अन्य किसी ऐप का भी इसी तरह दुरुपयोग पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर उन्हें ब्लॉक किया जाएगा।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
हाल के समय में कई ऐसी शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अचानक रिमोट के जरिए बंद कर दिया जाता था। इससे न केवल वाहन चालकों की आजीविका प्रभावित होती थी, बल्कि चलते वाहन के अचानक रुक जाने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता था। इसी को देखते हुए सरकार ने त्वरित हस्तक्षेप किया।

कैसे किया जा रहा था दुरुपयोग?
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ऐप्स का उपयोग सामान्यतः बैटरी की स्थिति, स्वास्थ्य, डायग्नोस्टिक्स और तकनीकी निगरानी के लिए किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सस्ते आयातित या असेंबल किए गए ईवी बैटरी सिस्टम में ब्लूटूथ सुरक्षा कमजोर होने के कारण इनका गलत इस्तेमाल संभव हो रहा था।
बताया गया है कि कई डिवाइसों में डिफॉल्ट ब्लूटूथ पेयरिंग कोड “0000” या “1234” जैसे सामान्य पासकोड थे, जिनका फायदा उठाकर अनधिकृत लोग वाहन के सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे।
विशेषज्ञों ने क्या दी सलाह?
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने ईवी निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा मानकों को अपनाने, सुरक्षित प्रमाणीकरण (Authentication) लागू करने और ब्लूटूथ सुरक्षा को बेहतर बनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तरों पर सुरक्षा बढ़ानी होगी।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों ने इसे ई-वाहन चालकों और आम जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने मांग की कि केवल ऐप हटाने के बजाय ऐसे वाहन निर्माताओं पर भी सख्त नियम लागू किए जाएं, जिनके उत्पादों में सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां पाई जाती हैं।
