
‘वंदे मातरम्’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी सियासी घमासान में अब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोनिया गांधी पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर तीखे राजनीतिक हमले किए और बहस को युवाओं के मुद्दों से जोड़ दिया।
‘वंदे मातरम्’ विवाद पर पप्पू यादव का बयान
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रहे विवाद पर बीजेपी पर निशाना साधा। सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत पूरा नहीं गाने के आरोपों के संदर्भ में उन्होंने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखी टिप्पणी की।
पप्पू यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल रही है।

BJP और RSS पर लगाए गंभीर आरोप
सांसद ने अपने बयान में बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास युवाओं, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर सवाल कर रही है। उनके मुताबिक, Gen-Z नौकरी, स्वास्थ्य और शिक्षा की बात कर रही है, जबकि राजनीतिक बहस को बार-बार हिंदू-मुसलमान और दूसरे भावनात्मक मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।
‘वंदे मातरम्’ को बताया सनातन संस्कृति का हिस्सा
पप्पू यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ उनके लिए जीवन और देश की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय है। उन्होंने बीजेपी पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
हालांकि, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रही मौजूदा बहस में बीजेपी और कांग्रेस दोनों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कांग्रेस ने पहले स्पष्ट किया है कि उसके स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में गीत का पूरा संस्करण गाया गया था।
‘बौद्धिक नक्सली’ टिप्पणी पर भी निशाना
पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘बौद्धिक नक्सली’ या वैचारिक नक्सली मानसिकता के संदर्भ को भी उठाया।
उन्होंने सवाल किया कि अगर वैचारिक असहमति को नक्सलवाद से जोड़ा जाएगा तो देश के कई ऐतिहासिक विचारकों और नेताओं को भी इसी नजर से देखा जा सकता है। उन्होंने बुद्ध, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और महात्मा गांधी समेत कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम लिए।
हालांकि, उनके इस तर्क को राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए, किसी ऐतिहासिक व्यक्ति पर आधिकारिक आरोप के रूप में नहीं।
राहुल गांधी के समारोह में नहीं पहुंचने पर बोले
राहुल गांधी के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि किसी नेता का किसी कार्यक्रम में पहुंचना अनिवार्य नहीं है।
उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपनी प्राथमिकताओं और विचारों के आधार पर कार्यक्रमों में शामिल होने का निर्णय लेने का अधिकार है।
Gen-Z बना पप्पू यादव के बयान का केंद्र
पप्पू यादव ने अपने बयान का बड़ा हिस्सा युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि आज की Gen-Z भावनात्मक नारों से ज्यादा रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सवालों के जवाब चाहती है।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश की राजनीति में युवा मतदाताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय नई पीढ़ी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। राजनीतिक दलों के लिए यह वर्ग आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
बयान से फिर गरमाई सियासत
‘वंदे मातरम्’ और ‘बौद्धिक नक्सली’ जैसे मुद्दों ने स्वतंत्रता दिवस के बाद राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। बीजेपी जहां राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्रमुखता दे रही है, वहीं विपक्ष सरकार पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा रहा है।
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनीति फिर भावनात्मक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमेगी या रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे सवाल बहस के केंद्र में लौटेंगे। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों की रणनीति और बयानबाजी पर सबकी नजर रहेगी।
