
मध्य प्रदेश में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय RGPV का नाम बदलने और इसे तीन हिस्सों में विभाजित करने की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जैसे ही यह खबर सामने आई, कांग्रेस ने राज्य सरकार पर इतिहास को मिटाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। इस मुद्दे ने शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में बहस छेड़ दी है।
दिग्विजय सिंह ने नाम बदलने के फैसले का किया विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि राजनीतिक मतभेद अलग बात है लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय का नाम यथावत रखा जाए और इतिहास के योगदान का सम्मान किया जाए।
राजीव गांधी के योगदान का किया गया उल्लेख
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राजीव गांधी ने देश में तकनीकी और आधुनिक शिक्षा की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि 1998 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान राजीव गांधी के सम्मान में RGPV की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि यह राज्य का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है और इसका नाम बदलना सही नहीं होगा।

नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष की भी प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार की योजना का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होगा और न ही युवाओं को रोजगार मिलेगा। सरकार का यह कदम केवल राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। हालांकि अब तक विश्वविद्यालय के नए नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इसके तीन हिस्सों में विभाजन की योजना चर्चा में बनी हुई है।
