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समाजवादी नेता आजम खान का बयान केस क्या बदल देगा राजनीतिक समीकरण

उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े एक पुराने विवादित मामले में आज बड़ा फैसला आने वाला है। यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कथित रूप से अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा और आचार संहिता उल्लंघन के तहत केस दर्ज किया गया था। अब एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट इस पर अपना निर्णय सुनाने जा रही है।

2019 चुनाव प्रचार का विवादित बयान बना केस की जड़

यह पूरा मामला 2019 के चुनाव प्रचार का है जब आजम खान रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में एक रोड शो कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अधिकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “इनसे चुनाव बाद जूते साफ कराऊंगा”। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक विवाद का कारण बन गया। चुनाव आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से रिपोर्ट मांगी थी। बाद में जांच के आधार पर स्थानीय प्रशासन के आदेश पर भोट थाने में मामला दर्ज किया गया था।

समाजवादी नेता आजम खान का बयान केस क्या बदल देगा राजनीतिक समीकरण

अदालत में ट्रायल पूरा, अब फैसले पर सबकी नजर

इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही थी और पिछले दिनों दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। अदालत ने 16 मई की तारीख को निर्णय सुनाने के लिए निर्धारित किया है। अब यह तय होना है कि आजम खान को इस मामले में दोषी ठहराया जाएगा या उन्हें राहत मिलेगी। इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है क्योंकि इसका असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।

जेल में बंद हैं आजम खान और उनके बेटे

फिलहाल आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम दोनों रामपुर जेल में बंद हैं। पिछले साल उन्हें फर्जी पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद दोबारा हिरासत में लिया गया था। लगातार कानूनी मामलों में घिरे आजम खान के लिए यह नया फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। समर्थकों और विरोधियों दोनों की नजर अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है क्योंकि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बन चुका है।

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