
जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उचाना विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि महंगाई केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर हर घर और हर वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान है जबकि किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। उनके अनुसार सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और लोगों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है।
किसानों के सामने उर्वरक और ईंधन का संकट
पूर्व डिप्टी सीएम ने कृषि क्षेत्र की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि धान की बुआई का समय नजदीक है लेकिन किसानों को जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रों में यूरिया की कमी शुरू हो चुकी है जबकि डीएपी खाद भी समय पर नहीं मिल रही है। इसके अलावा खनन और औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि किसान पहले से ही मौसम और लागत की मार झेल रहा है और अब उर्वरकों की कमी उसकी मुश्किलों को और बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी कीमतों पर उठाए सवाल
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हाल के समय में सीएनजी की कीमतों में करीब चार रुपये और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग आठ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन बचत के नाम पर प्रधानमंत्री के काफिले में कुछ गाड़ियां कम करने जैसे प्रतीकात्मक कदम उठा रही है लेकिन इससे आम लोगों को कोई राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने तर्क दिया कि सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सरकारी गतिविधियों में बड़ी मात्रा में ईंधन की खपत जारी रहती है। ऐसे में कुछ वाहनों की संख्या कम करने से वास्तविक समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसान को खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर चलाना होगा और सिंचाई के लिए ट्यूबवेल का उपयोग करना पड़ेगा जिसके लिए डीजल की जरूरत बनी रहेगी।
विदेश नीति और आर्थिक चुनौतियों पर भी जताई चिंता
दुष्यंत चौटाला ने देश की आर्थिक स्थिति को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि भारत पहले रूस से तेल और उर्वरकों की आपूर्ति प्राप्त करता था लेकिन अब मध्य-पूर्व पर निर्भरता बढ़ गई है। उनका कहना था कि वैश्विक संकटों के दौरान यह निर्भरता देश के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण भारत अपने कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक संबंधों को कमजोर कर चुका है। चौटाला ने कहा कि जब मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ी तो नए सहयोगी देश भी अपेक्षित समर्थन नहीं दे सके। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देकर ही हालात में सुधार लाया जा सकता है।
