
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब बच्चों की पढ़ाई केवल किताब, कॉपी और कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। मोबाइल आधारित ‘पढ़ाई’ ऐप के जरिए छात्र घर बैठे बिना इंटरनेट के भी भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित कर सकेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित इस ऐप का पायलट प्रोजेक्ट जिले के ताजपुर और मोरवा प्रखंड के चयनित सरकारी विद्यालयों में मार्च 2027 तक चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से लागू किया जाएगा और इसमें कक्षा 3 से 5 तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा।
AI बताएगा किस बच्चे को किस विषय में अधिक मदद की जरूरत
हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘पढ़ाई’ ऐप बच्चों के प्रदर्शन का रियल-टाइम विश्लेषण करेगा। यह बताएगा कि किस छात्र को भाषा या गणित में अतिरिक्त अभ्यास और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इससे शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति समझने में आसानी होगी और वे उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाई करा सकेंगे। कमजोर छात्रों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से हो सकेगी।

उच्चारण, पढ़ने की गति और गणितीय क्षमता का होगा मूल्यांकन
यह AI आधारित ऐप केवल पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध नहीं कराएगा, बल्कि बच्चों की पढ़ने की क्षमता का भी आकलन करेगा। जब छात्र पाठ पढ़ेंगे, तब ऐप उनकी आवाज सुनकर उच्चारण, पढ़ने की गति और होने वाली गलतियों का विश्लेषण करेगा। इसके अलावा ‘असर’ टूल के आधार पर गणितीय दक्षता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इससे बच्चों की भाषा और गणित की बुनियादी समझ मजबूत होगी और आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर आधार तैयार होगा।
घर बैठे भी मिलेगा अभ्यास का अवसर
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस ऐप का उद्देश्य स्कूल की पढ़ाई का विकल्प बनना नहीं है, बल्कि छात्रों को अतिरिक्त अभ्यास का अवसर देना है। स्कूल के बाद बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार घर पर भी अभ्यास कर सकेंगे। खासकर ऐसे विद्यार्थियों को इसका अधिक लाभ मिलेगा जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता। साथ ही अभिभावक और शिक्षक भी ऐप के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रगति पर आसानी से नजर रख सकेंगे।
