स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन बनेगा सांस्कृतिक संगम, मध्य प्रदेश समेत चार राज्यों की कला होगी प्रदर्शित

इस बार स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रपति भवन समारोह सिर्फ औपचारिक आयोजन नहीं होगा। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों की लोककला, आदिवासी परंपराएं और पर्यावरण संरक्षण की झलक एक साथ नजर आएगी, जिसमें मध्य प्रदेश की भील-गोंड कला और बाघ प्रिंट खास आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
राष्ट्रपति भवन में सजेगी जनजातीय विरासत
15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम में भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी। करीब 500 मेहमानों वाले इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, राजनीतिक नेता, राजनयिक, राजदूत और विदेशी मेहमान शामिल होंगे।
इस बार कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की जनजातीय और पारंपरिक कला को विशेष स्थान दिया गया है। मालवा-निमाड़ की संस्कृति से लेकर भील और गोंड कला तक, कई रंग राष्ट्रपति भवन की सजावट और मेहमानों के बीच दिखाई देंगे।
भील और गोंड संस्कृति का खास प्रदर्शन
कार्यक्रम में भील समुदाय के घर और गोंड समुदाय के आंगन की थीम भी दिखाई जाएगी। इसके साथ आदिवासी विवाह स्थल की झलक भी मेहमानों को भारत की ग्रामीण और जनजातीय जीवनशैली से रूबरू कराएगी।

इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य केवल सजावट करना नहीं, बल्कि देश की उन सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाना है, जो पीढ़ियों से समुदायों की पहचान बनी हुई हैं।
बाघ प्रिंट बनेगा खास आकर्षण
मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध बाघ प्रिंट भी इस आयोजन में अपनी अलग पहचान बनाएगा। शाही चांदी के बर्तनों और राष्ट्रपति के विशेष क्रॉकरी सेट के बीच रखा बाघ प्रिंट का नमूना भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को दर्शाएगा।
बाघ प्रिंट अपनी पारंपरिक तकनीक और प्राकृतिक रंगों के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इसका प्रदर्शन मध्य प्रदेश की हस्तकला के लिए भी गौरव का विषय है।
दूसरे राज्यों की कला भी होगी शामिल
कार्यक्रम में सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गोवा की कला परंपराओं को भी जगह दी गई है। छत्तीसगढ़ की मेटल आर्ट और महाराष्ट्र तथा गोवा की ज्यामितीय कलाकृतियां इस सांस्कृतिक प्रस्तुति को और व्यापक बनाएंगी।
इस तरह एक ही परिसर में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की कला, परंपरा और रचनात्मकता का संगम देखने को मिलेगा।
निमंत्रण पत्र भी बना कला का हिस्सा
इस कार्यक्रम का निमंत्रण-पत्र भी खास चर्चा में है। इसकी थीम और डिजाइन चार राज्यों—छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र—की कला परंपराओं, पहाड़ी भू-भाग और नदियों से जुड़ी पर्यावरण संरक्षण की अवधारणाओं पर आधारित है।
पूरे निमंत्रण पैकेज को अहमदाबाद के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) ने तैयार किया है। इसमें कला के साथ सतत पर्यावरणीय प्रथाओं और सामुदायिक भागीदारी को भी प्रमुखता दी गई है।
स्वतंत्रता दिवस पर संस्कृति का संदेश
राष्ट्रपति भवन का यह आयोजन भारत की विविधता को एक मंच पर लाने की कोशिश है। जनजातीय कला से लेकर पारंपरिक हस्तशिल्प और पर्यावरण संरक्षण तक, इस बार समारोह में संस्कृति और प्रकृति दोनों की कहानी दिखाई देगी।
मध्य प्रदेश की भील, गोंड और बाघ प्रिंट परंपराओं को राष्ट्रीय मंच मिलना यह याद दिलाता है कि भारत की पहचान सिर्फ उसकी आधुनिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सदियों पुरानी लोक और जनजातीय विरासत से भी बनती है।
