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राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका, विपक्ष ने किया उपसभापति चुनाव का बहिष्कार

राज्यसभा के उपसभापति चुनाव से पहले देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने इस चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार के रवैये के विरोध में लिया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और विपक्ष से किसी तरह की सार्थक चर्चा नहीं की गई। इस घोषणा के बाद संसद के ऊपरी सदन में होने वाला चुनाव अब और भी ज्यादा राजनीतिक महत्व हासिल कर चुका है।

डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने पर उठे सवाल

विपक्ष के बहिष्कार का सबसे बड़ा कारण लोकसभा में पिछले सात वर्षों से डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं होना बताया जा रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि यह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई और यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि Narendra Modi सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष से कोई सलाह मशविरा नहीं किया। विपक्ष का मानना है कि जब लोकसभा में डिप्टी स्पीकर नहीं है, तो राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव को लेकर भी पारदर्शिता और सहमति जरूरी है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए चुनाव से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।

राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका, विपक्ष ने किया उपसभापति चुनाव का बहिष्कार

हरिवंश की उम्मीदवारी पर उठे नए सवाल

इस पूरे विवाद के केंद्र में Harivansh Narayan Singh की उम्मीदवारी भी है। उन्हें हाल ही में तीसरी बार राज्यसभा के लिए नामित किया गया है और अब एनडीए की ओर से उन्हें उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। जयराम रमेश ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य को इस पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विरोध व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि प्रक्रिया और सिद्धांतों को लेकर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर हरिवंश तीसरी बार इस पद पर आते हैं, तो वह विपक्ष के सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील रहेंगे।

चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव, आगे क्या होगा

राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव 17 अप्रैल को होना है और इस बीच राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। विपक्ष का बहिष्कार जहां एक तरफ सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, वहीं एनडीए अपनी संख्या बल के दम पर जीत दर्ज करने की कोशिश करेगा। राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा हरिवंश को नामित किए जाने के बाद यह मामला और भी ज्यादा चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव के दिन क्या तस्वीर सामने आती है और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराता है।

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