राज्य

साकेत कोर्ट ने CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की याचिका खारिज की, पुलिस पर लगाए थे आरोप

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर उन्हें रोकने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। रत्ना सिंह का आरोप था कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया और उनकी स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ।

साकेत कोर्ट ने सुनाया फैसला

साकेत कोर्ट के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे ने रत्ना सिंह की याचिका पर आदेश दिया। इस मामले में उनकी ओर से अधिवक्ता अदित एस. पुजारी ने पक्ष रखा।

याचिका में पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और संबंधित अधिकारियों से स्टेटस रिपोर्ट मंगाने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने उनकी अर्जी खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट जा रही थीं रत्ना सिंह

याचिका के मुताबिक, पेशे से वकील रत्ना सिंह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वकीलों के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही थीं। उनके साथ दो अन्य वकील भी थे।

रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि अपने घर के बाहर के इलाके में लौटने के बाद वह वकील तारा नरूला के साथ एक कार में बैठी थीं। इसी दौरान कथित तौर पर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया।

दो कारों से रास्ता रोकने का लगाया आरोप

याचिका में दावा किया गया कि दो कारों ने उनकी गाड़ी को आगे और पीछे से रोक लिया था। आरोप है कि पुलिसकर्मी भी कार के बाहर मौजूद थे और रत्ना सिंह को आगे जाने नहीं दिया गया।

साकेत कोर्ट ने CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की याचिका खारिज की, पुलिस पर लगाए थे आरोप

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रोकने की वजह पूछने के बावजूद उन्हें इसका कानूनी आधार नहीं बताया गया। याचिका में पुलिस को किए गए कॉल और उससे जुड़ी जानकारियों का भी उल्लेख किया गया था।

पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग

रत्ना सिंह ने अदालत से कथित घटना की जांच कराने और इसमें शामिल बताए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। इसके अलावा, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की स्थिति पर रिपोर्ट मांगे जाने की अपील भी की।

याचिका में उनकी स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए थे; इन्हें पुलिस के खिलाफ साबित हुए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का मामला

यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वकीलों के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार, आवाजाही की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

फिलहाल, साकेत कोर्ट ने रत्ना सिंह की याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई क्या होगी, यह संबंधित पक्षों के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button