
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फरीदाबाद में कांग्रेस का विरोध मार्च चल रहा था। नारेबाजी और राजनीतिक विरोध के बीच अचानक दो महिला नेताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद थप्पड़बाजी तक पहुंच गया और मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं को दोनों को अलग करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
चांदी वाली धर्मशाला से शुरू हुआ मार्च
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए ओल्ड फरीदाबाद में पैदल मार्च निकाला। यह मार्च चांदी वाली धर्मशाला से शुरू होकर पथवारी मंदिर तक जाना था। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर्ल चौधरी और जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक कर रहे थे।
मार्च में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नेता शामिल हुए। इसी दौरान हुई एक घटना ने पूरे प्रदर्शन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बैनर के साथ चल रही थीं पराग शर्मा
मार्च में बल्लभगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं कांग्रेस नेता पराग शर्मा पार्टी के बैनर को पकड़कर चल रही थीं। उनके साथ गजना लांबा भी मौजूद थीं।
बताया गया कि गजना लांबा बैनर के साथ आगे निकलने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पराग शर्मा ने कथित तौर पर गजना लांबा को थप्पड़ मार दिया।
जवाब में गजना ने भी मारा थप्पड़
पराग शर्मा के थप्पड़ के बाद गजना लांबा ने भी कथित तौर पर जवाब में उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
मार्च में साथ चल रहे जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक और अन्य नेताओं ने दोनों को अलग करने की कोशिश की।
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जिलाध्यक्ष ने मामले को बताया मामूली विवाद
घटना के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक ने इसे ज्यादा बड़ा विवाद नहीं बताया। उनका कहना है कि भीड़ में साथ चलते समय कभी-कभी किसी का हाथ लग सकता है।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच जो हाथापाई हुई है, उसे जल्द ही बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा। यानी पार्टी स्तर पर फिलहाल मामले को शांत कराने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक प्रदर्शन के बीच निजी विवाद बना चर्चा
कांग्रेस का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर पार्टी के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान दो महिला नेताओं के बीच हुई हाथापाई ने राजनीतिक मुद्दे से अलग एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में नेताओं के व्यवहार पर भी लोगों की नजर रहती है। इसलिए मामूली कहासुनी भी जल्द चर्चा का विषय बन जाती है। इस घटना ने भी यही दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान अनुशासन और संयम कितना जरूरी है।
अब समझौते पर टिकी नजर
जिला कांग्रेस नेतृत्व ने मामले को जल्द सुलझाने की बात कही है। अब देखना होगा कि दोनों नेताओं के बीच विवाद किस तरह खत्म होता है। फिलहाल पार्टी का प्रयास यही है कि घटना को आगे बढ़ने से रोका जाए और प्रदर्शन से जुड़े मूल राजनीतिक मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित रखा जाए।
एक राजनीतिक प्रदर्शन का उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना होता है। लेकिन जब मंच से बाहर का विवाद सुर्खियां बनने लगे, तो संदेश पीछे छूट जाता है। फरीदाबाद की यह घटना भी राजनीतिक दलों के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में संयम और अनुशासन की अहमियत याद दिलाती है।
