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राहुल गांधी से व्यापारियों ने मांगा जवाब, विरोध प्रदर्शनों से कितना हुआ नुकसान?

DELHI NEWS (Globl times):   दिल्ली में कांग्रेस की रैली और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर अब व्यापारियों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर विरोध करने का अधिकार क्या आम लोगों की रोजी रोटी और व्यापार करने के अधिकार से बड़ा है। संगठन ने इस पत्र में पांच सवाल उठाए हैं और प्रदर्शनों के चलते हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी की है।

CAIT का कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सड़कों पर प्रदर्शन करके दूसरे लोगों के कामकाज को रोक दिया जाए। संगठन के मुताबिक पिछले एक महीने से लगातार हो रही रैलियों और सड़क जाम के चलते व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी है। खासकर त्योहारों के समय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई और दुकानदारों को आर्थिक नुकसान हुआ है।

पत्र में राहुल गांधी से पहला सवाल यही किया गया है कि क्या विरोध करने का अधिकार व्यापार और आजीविका कमाने के अधिकार से ज्यादा जरूरी है। दूसरा सवाल दिल्ली के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करने को लेकर है। CAIT ने पूछा है कि छोटे कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।

तीसरे सवाल में संगठन ने राहुल गांधी के उस आह्वान पर सवाल उठाया है जिसमें रैली में शामिल लोगों से स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील की गई थी। CAIT का कहना है कि एक तरफ बाजारों में खरीदारी की बात की जा रही है और दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शनों से ग्राहकों का बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

चौथे सवाल में राहुल गांधी और कांग्रेस से नुकसान की जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। वहीं पांचवें सवाल में पूछा गया है कि अगर किसी के अपने काम और कमाई में लंबे समय तक रुकावट आए तो क्या वह इसे चुपचाप बर्दाश्त करेगा।

फिलहाल इस पत्र पर राहुल गांधी या कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की महारैली के बाद चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज ने करीब 11 हजार करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की थी। अब CAIT के इस पत्र से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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