पुलिस भी वकील को मनमाने तरीके से नहीं कर सकती गिरफ्तार! जानिए क्या कहता है कानून

INDIA NEWS(Globl times): पुलिस की वर्दी देखकर अच्छे अच्छे लोग अपनी बात कहने से पहले सोचने लगते हैं। किसी को थाने बुलाना हो या फिर गिरफ्तार करना हो पुलिस के पास कई तरह के अधिकार होते हैं। लेकिन जब मामला किसी वकील से जुड़ता है तो अक्सर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगते हैं। कई बार बार एसोसिएशन भी सामने आ जाता है और मामला अदालत तक पहुंच जाता है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर वकील Vs पुलिस की इस लड़ाई में किसके पास ज्यादा ताकत होती है।
दरअसल पुलिस और वकील दोनों का काम कानून से जुड़ा है लेकिन दोनों की जिम्मेदारी अलग अलग होती है। पुलिस का काम अपराध रोकना और किसी घटना की जांच करना है। पुलिस शिकायत मिलने पर जांच कर सकती है। सबूत जुटा सकती है और कानून में तय शर्तें पूरी होने पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर सकती है।
दूसरी तरफ वकील का काम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर अदालत में उनका पक्ष रखना है। अगर पुलिस किसी व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार करती है या कानून के नियमों का पालन नहीं करती है तो वकील उस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दे सकता है।
यही वजह है कि कई मामलों में वकीलों की भूमिका काफी अहम हो जाती है। पुलिस के पास वर्दी और कानूनी अधिकार जरूर हैं लेकिन उसे भी संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना पड़ता है। किसी को भी बिना वजह परेशान करना या हिरासत में उसके अधिकारों को नजरअंदाज करना पुलिस के लिए सही नहीं है।
कानून के मुताबिक गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी की वजह बताना जरूरी है। उसे अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार भी मिलता है। साथ ही गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। ये अधिकार सिर्फ वकीलों के लिए नहीं बल्कि हर नागरिक के लिए हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वकील पुलिस से ज्यादा ताकतवर हैं या पुलिस वकीलों से ऊपर है। दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां अलग हैं। पुलिस कानून लागू करती है और वकील यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि कानून का पालन हो। आखिरकार दोनों से ऊपर कानून है और उसी के हिसाब से हर किसी को काम करना पड़ता है।
