बेला रेल पहिया कारखाना बना भारतीय रेलवे की ताकत, हर साल बना रहा नए उत्पादन रिकॉर्ड

बिहार के बेला स्थित रेल पहिया कारखाना लगातार उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कारखाना प्रबंधन के अनुसार पिछले कई वर्षों से यहां रेल पहियों के निर्माण और आपूर्ति में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहां 42,167 रेल पहियों का उत्पादन हुआ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 53,091 और 2025-26 में 60,769 रेल पहियों तक पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30 जून तक ही 18,261 रेल पहियों का निर्माण किया जा चुका है, जिससे इस वर्ष भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।
रखरखाव और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
कारखाने के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) उत्तम कुमार सिंह ने बताया कि उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर वर्ष लगभग 45 दिनों का शटडाउन लिया जाता है। इस दौरान सभी मशीनों और उपकरणों का विस्तृत निरीक्षण, मरम्मत और तकनीकी रखरखाव किया जाता है। इसके बाद उत्पादन दोबारा शुरू किया जाता है, जिससे मशीनों की कार्यक्षमता और उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहती है।

कच्चे माल की नहीं है कोई कमी
प्रबंधन के अनुसार कारखाने में आठ से नौ महीने की जरूरत के अनुसार कच्चा माल पहले से उपलब्ध रहता है। पुराने रेल पहियों सहित अन्य आवश्यक सामग्री देश के विभिन्न रेलवे डिपो और जोनों से मंगाई जाती है। वहीं उत्पादन में उपयोग होने वाले खनिज और अन्य संसाधन निर्धारित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से खरीदे जाते हैं। इससे उत्पादन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के लगातार चलती रहती है।
आधुनिक तकनीक से मजबूत हो रही रेलवे
करीब 293.33 एकड़ क्षेत्र में फैले इस रेल पहिया कारखाने की आधारशिला 29 जुलाई 2008 को रखी गई थी और लगभग 1,639.59 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना से फरवरी 2013 में पहला रेल पहिया भेजा गया था। कारखाने में 132 केवी विद्युत आपूर्ति के साथ 1 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट भी संचालित है। आधुनिक तकनीक, बेहतर संसाधन और कुशल रखरखाव के दम पर बेला रेल पहिया कारखाना आज भारतीय रेलवे की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
