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इंदरजीत की गिरफ्तारी से राजजीत हुंदल तक, ड्रग केस ने पंजाब पुलिस के शीर्ष अफसरों को आमने-सामने ला दिया

मामले की अहम कड़ी 2017 में इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह की गिरफ्तारी थी। STF ने उसके खिलाफ ड्रग तस्करी और NDPS मामलों से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। जांच के दौरान राजजीत सिंह हुंदल, जो उस समय मोगा के SSP थे, के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल हुई।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की SIT ने राजजीत की कथित भूमिका की जांच की। SIT ने 2018 में कई रिपोर्टें अदालत को सौंपीं।

STF प्रमुख पर उठाए सवाल

उस समय STF की कमान ADGP हरप्रीत सिंह सिद्धू के पास थी। राजजीत ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सिद्धू के खिलाफ पक्षपात के आरोप लगाए और हाई कोर्ट का रुख किया।

इसके बाद अदालत ने राजजीत की भूमिका की जांच के लिए अलग SIT गठित की। इसमें DGP सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, प्रबोध कुमार और कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल थे।

जांच पहुंची पुलिस के शीर्ष स्तर तक

SIT की जांच के दौरान राजजीत और इंदरजीत के बीच कथित संबंधों तथा इंदरजीत की पोस्टिंग और पदोन्नति से जुड़े सवालों की पड़ताल हुई। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में SIT द्वारा राजजीत की कथित संलिप्तता और आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े निष्कर्षों का उल्लेख है।

इसी दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मतभेद भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने। जांच को लेकर तत्कालीन पुलिस नेतृत्व में खींचतान ने मामले को और पेचीदा बना दिया।

इंदरजीत की गिरफ्तारी से राजजीत हुंदल तक, ड्रग केस ने पंजाब पुलिस के शीर्ष अफसरों को आमने-सामने ला दिया

NDPS मामलों में गंभीर आरोप

SIT ने NDPS मामलों में कथित हेरफेर, फोरेंसिक रिपोर्ट में देरी और कथित तौर पर नशीले पदार्थ रखने जैसे आरोपों की भी जांच की। अदालत के रिकॉर्ड में इन आरोपों का उल्लेख है, लेकिन आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य सरकार ने 2023 में SIT रिपोर्टों पर कार्रवाई करते हुए राजजीत को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। बाद में उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया।

गिरफ्तारी तक पहुंची लंबी कानूनी लड़ाई

बर्खास्तगी के बाद राजजीत की गिरफ्तारी लंबे समय तक टलती रही। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 2023 में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 16 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया।

24 सितंबर 2026 को ANTF ने पटियाला स्थित एक घर से राजजीत सिंह हुंदल को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ ड्रग केस के साथ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों की जांच भी हुई है।

एक गिरफ्तारी, जिसकी गूंज बहुत दूर तक गई

राजजीत हुंदल मामला अब सिर्फ एक पूर्व पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी की खबर नहीं है। इसकी शुरुआत ड्रग मामलों की जांच से हुई, लेकिन आगे चलकर इसमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका, SIT रिपोर्ट, विभागीय कार्रवाई और अदालत की निगरानी जैसे कई अध्याय जुड़ते गए।

अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। आरोपों की अंतिम पुष्टि और कानूनी जिम्मेदारी का फैसला अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा। यही इस लंबे विवाद का सबसे अहम निष्कर्ष है।

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