
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच योगी सरकार ने Dedicated Backward Class Commission Uttar Pradesh का गठन कर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि इस आयोग के बनने से पंचायत स्तर पर आरक्षण और प्रतिनिधित्व की स्थिति स्पष्ट होगी और चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आसानी होगी। यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह बने आयोग के अध्यक्ष
इस आयोग की जिम्मेदारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ रिटायर्ड अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा को भी सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग में शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि अनुभवी अधिकारियों और न्यायविदों की मौजूदगी से रिपोर्ट अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होगी।

OBC हिस्सेदारी और आरक्षण पर होगा विस्तृत सर्वे
Dedicated Backward Class Commission Uttar Pradesh को राज्य के विभिन्न जिलों में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन करने का जिम्मा दिया गया है। यह आयोग पंचायत स्तर पर OBC वर्ग की हिस्सेदारी का विस्तृत सर्वे करेगा। इसके साथ ही मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा भी की जाएगी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण 27 प्रतिशत की सीमा से आगे नहीं जाएगा।
रिपोर्ट के बाद तय होगी पंचायत चुनाव की दिशा
आयोग अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपेगा जिसके आधार पर पंचायत चुनाव में आरक्षण की नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही पंचायत चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम चुनावी रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है और इससे राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की दिशा तय होगी।
