
पंजाब की राजनीति में उस समय नई बहस शुरू हो गई जब Jagmohan Raju ने राज्य में सिख आबादी की धीमी वृद्धि को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जनसांख्यिकीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
तीसरे और चौथे बच्चे पर प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव
Jagmohan Raju ने अपनी चिट्ठी में सुझाव दिया कि यदि किसी सिख परिवार में तीसरा बच्चा होता है तो सरकार को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए। वहीं चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। उनका मानना है कि इस तरह की आर्थिक मदद से सिख समुदाय में जन्म दर को बढ़ावा दिया जा सकता है और जनसंख्या संतुलन बनाए रखा जा सकता है। यह प्रस्ताव अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

राष्ट्रीय आंकड़ों और प्रवास पर चिंता
अपने पत्र में Jagmohan Raju ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सिख समुदाय में प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से कम है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब में रोजगार के कारण अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, जिससे स्थानीय जनसंख्या अनुपात प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इसे एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बताया है, जिस पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है।
लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर भी जताई चिंता
Jagmohan Raju ने अपने पत्र में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व तय होता है। ऐसे में यदि पंजाब की जनसंख्या वृद्धि दर अन्य राज्यों से कम रहती है, तो भविष्य में राज्य की राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रभाव कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सामाजिक नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन का भी मुद्दा है। इसी कारण उन्होंने सरकार से एक ठोस नीति और दीर्घकालिक योजना बनाने की अपील की है।
