
हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो परियोजना को नई रफ्तार देते हुए इसके संशोधित बजट और तकनीकी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक बनने वाली यह मेट्रो परियोजना अब और व्यापक रूप से विकसित होगी। सरकार ने वर्ल्ड बैंक से मिलने वाले सॉफ्ट लोन प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है जिससे वित्तीय अड़चनें दूर होंगी और परियोजना तेज गति से आगे बढ़ सकेगी। इस निर्णय को गुरुग्राम के शहरी परिवहन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
10 हजार करोड़ से ऊपर पहुंची लागत
निर्माण लागत में भारी वृद्धि से संशोधित बजट मंजूर। कैबिनेट ने गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की लागत को 5,452.72 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,266.54 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार के अनुसार इस बढ़ोतरी के पीछे 2019 से 2023 के बीच निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि, जीएसटी दरों में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा अतिरिक्त कोच, डिपो निर्माण और आरआरटीएस अलाइनमेंट में बदलाव भी लागत बढ़ने के मुख्य कारण बने हैं। सरकार का मानना है कि यह निवेश भविष्य में शहर की ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक हल करेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।

28.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 27 स्टेशन
गुरुग्राम मेट्रो से शहर के प्रमुख हिस्से होंगे आपस में जुड़े। यह मेट्रो कॉरिडोर 28.50 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें कुल 27 स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी सेंटर और प्रमुख रिहायशी व कॉर्पोरेट क्षेत्र शामिल होंगे। सरकार ने सेक्टर-5 से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक 1.80 किलोमीटर का अतिरिक्त लिंक भी मंजूर किया है, जिससे मेट्रो और रेलवे नेटवर्क के बीच मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
रैपिड मेट्रो इंटीग्रेशन और वर्ल्ड बैंक फंडिंग से मिलेगी गति
परियोजना को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और आधुनिक ढांचे का समर्थन मिला। कैबिनेट ने रैपिड मेट्रो इंटीग्रेशन रिपोर्ट को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत सेक्टर-33 में 22.86 हेक्टेयर भूमि पर आधुनिक डिपो विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने निर्णय लिया है कि परियोजना की पूरी फंडिंग अब वर्ल्ड बैंक से सॉफ्ट लोन के माध्यम से ली जाएगी, क्योंकि यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से मंजूरी में देरी हो रही थी। अधिकारियों को परियोजना में तेजी लाने के लिए आवश्यक अधिकार भी दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह मेट्रो गुरुग्राम को एक स्मार्ट और विश्वस्तरीय शहर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
