राज्यराजनीति

ट्विशा और दीपिका मौत मामले में सियासत तेज, अखिलेश ने सरकार को घेरा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के भोपाल और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में हुई दो अलग अलग युवतियों की मौत के मामलों पर गंभीर टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दोनों ही मामलों की निष्पक्ष और गंभीर जांच होनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके. अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि जब दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं तो फिर अब तक कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में हलचल तेज हो गई है और मामले ने सियासी रूप ले लिया है.

नोएडा की दीपिका मौत मामला और परिवार के आरोप

गौतमबुद्धनगर के ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक 3 क्षेत्र के जलपुरा गांव में 24 वर्षीय दीपिका नागर की संदिग्ध मौत ने इलाके को झकझोर दिया है. परिवार का आरोप है कि यह दहेज हत्या का मामला है और उनकी बेटी को प्रताड़ित किया गया. दीपिका की मां सरोज नागर ने बताया कि उन्हें देर रात यह सूचना दी गई कि उनकी बेटी छत से गिर गई है लेकिन घटना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि यह हादसा था तो वास्तविक कारण क्यों नहीं बताया गया. इस मामले ने स्थानीय स्तर पर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं.

ट्विशा और दीपिका मौत मामले में सियासत तेज, अखिलेश ने सरकार को घेरा

भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला

मध्य प्रदेश के भोपाल में 12 मई को ट्विशा शर्मा अपने ससुराल में संदिग्ध हालत में फांसी पर लटकी हुई पाई गई थी. पुलिस ने इस मामले में 15 मई को एफआईआर दर्ज की जिसमें पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है. जांच में भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया है लेकिन शरीर पर चोटों के निशान मिलने से मामला और संदिग्ध हो गया है. यह केस दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों से जुड़ा हुआ है.

राजनीतिक विवाद और न्याय की मांग तेज

इन दोनों मामलों को लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है. अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है कि जब दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार है तो जांच और कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है. उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है. विपक्ष भी इन मामलों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है. दूसरी ओर पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटी हुई है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है. इन घटनाओं ने एक बार फिर दहेज उत्पीड़न और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे मामले पर नजरें टिकी हुई हैं.

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