
बिहार में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच मुंगेर जिले के तारापुर में एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के घर की सीढ़ी को भी तोड़ दिया गया। यह कार्रवाई सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत की गई बताई जा रही है। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन ने इसे नियमों के तहत की गई सामान्य कार्रवाई बताया है जिसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तारापुर में दिया बड़ा बयान
रविवार को तारापुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें रिपोर्ट मिली थी कि उनके घर की सीढ़ी को भी प्रशासन ने हटाने की कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी का घर निजी जमीन पर है तो कोई समस्या नहीं है लेकिन यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है तो उसे हटाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता और विकसित बिहार के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।

विकास और सुशासन पर मुख्यमंत्री ने रखी अपनी प्राथमिकता
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें पहली बार तारापुर से विधायक बनने का अवसर मिला और इसके बाद उन्हें राज्य की जिम्मेदारी भी मिली जो उनके लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अधूरे विकास कार्यों को पूरा करना और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अपने क्षेत्र की सेवा को प्राथमिकता बताते हुए विकास कार्यों में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
नीतीश कुमार के कार्यों और भविष्य की योजनाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल की भी सराहना की और कहा कि बिहार के विकास की नींव मजबूत करने में उनका बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है और कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। फोरलेन सड़कों के विस्तार और कोलकाता तक एक्सप्रेसवे की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। इसके अलावा बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन के लिए नई योजनाएं तैयार की जा रही हैं जिससे भविष्य में राज्य को बड़ी राहत मिलेगी।
