राज्यराजनीति

110 पार्षद प्रत्याशियों के साथ वार्ड स्तर पर दिलचस्प चुनावी मुकाबला तेज

नामांकन के अंतिम दिन शहर की लघुसचिवालय परिसर में सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली। मेयर और पार्षद पद के लिए उम्मीदवारों का तांता लगातार लगा रहा। कई प्रत्याशी ढोल नगाड़ों और समर्थकों के बड़े काफिले के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे जिससे पूरा परिसर चुनावी उत्सव में बदल गया। दिनभर चली इस प्रक्रिया में कुल 12 उम्मीदवारों ने मेयर पद के लिए और 110 से अधिक नेताओं ने पार्षद पद के लिए अपने नामांकन पत्र जमा किए। 27 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 28 अप्रैल तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद चुनाव चिन्हों का आवंटन कर अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी जिससे मुकाबले की असली तस्वीर साफ हो जाएगी।

मेयर पद की जंग में भाजपा कांग्रेस समेत कई दलों की एंट्री

मेयर पद के लिए इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है क्योंकि भाजपा कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा से राजीव जैन और कांग्रेस से कमल दीवान जैसे प्रमुख चेहरे चुनावी मैदान में हैं। इनके अलावा इंडियन नेशनल लोकदल और आम आदमी पार्टी ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं जिससे मुकाबला बहुकोणीय बन गया है। कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी दो दो नामांकन दाखिल कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। वार्ड स्तर पर भी भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है जहां कुछ वार्डों में 8 से 9 उम्मीदवार तक मैदान में हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि इस बार का चुनाव बेहद कड़ा और अप्रत्याशित परिणाम वाला हो सकता है।

110 पार्षद प्रत्याशियों के साथ वार्ड स्तर पर दिलचस्प चुनावी मुकाबला तेज

टिकट कटते ही दलों में बगावत, छह नेताओं ने भरा निर्दलीय नामांकन

नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में अंदरूनी बगावत खुलकर सामने आ गई। टिकट न मिलने से नाराज कई वरिष्ठ नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया। भाजपा के मौजूदा पार्षद पुनीत त्यागी और सुरेंद्र नैय्यर ने भी बगावत करते हुए स्वतंत्र रूप से नामांकन किया। कांग्रेस में भी मोनिका नागर और अन्य नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। टिकट वितरण में अंतिम समय पर हुए बदलाव ने भी विवाद को और बढ़ा दिया जिससे कई नामांकन विवादों के केंद्र में आ गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बागी उम्मीदवार मुख्य दलों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं।

चुनावी समीकरण बदलने में जुटे दल, 28 अप्रैल को साफ होगी तस्वीर

अब सभी राजनीतिक दल अपने बागी नेताओं को मनाने में जुट गए हैं क्योंकि 28 अप्रैल को नाम वापसी की अंतिम तारीख है। इसी दिन यह तय होगा कि कौन उम्मीदवार मैदान में रहेगा और कौन पीछे हटेगा। आम आदमी पार्टी ने भी अपने मेयर प्रत्याशी के समर्थन में प्रदेश अध्यक्ष को नामांकन प्रक्रिया में शामिल कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। वार्ड स्तर पर प्रत्याशियों की लंबी सूची ने चुनाव को और जटिल बना दिया है। प्रशासन अब पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है ताकि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। राजनीतिक हलकों में यह चुनाव शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच माना जा रहा है जहां हर वोट महत्वपूर्ण साबित होगा।

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