
प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार तीसरे कार्यकाल में देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर हैं। वह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में शीर्ष स्थान हासिल करने जा रहे हैं। इस अवसर को भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तुलना को लेकर तीखा बयान दिया है।
“सिर्फ एक दिन ज्यादा रहने से क्या बदल जाएगा?”
संजय राउत ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी नेता का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना ही उसकी उपलब्धि का पैमाना नहीं हो सकता। उनके अनुसार, यह अधिक महत्वपूर्ण है कि उस कार्यकाल में देश को क्या हासिल हुआ।
राउत ने कहा कि नेहरू ने स्वतंत्र भारत की संस्थाओं, लोकतांत्रिक ढांचे और विकास की बुनियाद तैयार की थी। उनका दावा है कि केवल कार्यकाल की अवधि बढ़ जाने से किसी नेता की तुलना नेहरू से नहीं की जा सकती।
लोकतंत्र और संस्थाओं को लेकर आरोप
अपने बयान में राउत ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने लोकतंत्र को मजबूत किया, जबकि मौजूदा शासन में संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर लगातार बहस होती रही है।
हालांकि, भाजपा और केंद्र सरकार इन आरोपों को पहले भी खारिज करती रही हैं और दावा करती हैं कि उनके शासन में लोकतंत्र और अधिक मजबूत हुआ है।
75 वर्ष की उम्र वाला मुद्दा भी उठाया
राउत ने प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि भाजपा में एक समय 75 वर्ष की आयु के बाद सक्रिय पद छोड़ने की चर्चा होती थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सिद्धांत अब भी लागू है या नहीं।
यह मुद्दा पहले भी विपक्ष की ओर से समय-समय पर उठाया जाता रहा है।
बीजेपी के लिए उपलब्धि, विपक्ष के लिए बहस का विषय
प्रधानमंत्री मोदी का लंबा कार्यकाल भाजपा के लिए राजनीतिक स्थिरता और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है। वहीं विपक्ष इस उपलब्धि को केवल अवधि के बजाय शासन के परिणामों और नीतियों के आधार पर आंकने की बात कर रहा है।
यही कारण है कि रिकॉर्ड बनने से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या जनता के सामने रख रहे हैं।
इतिहास बनाम वर्तमान की राजनीति
भारतीय राजनीति में नेहरू और मोदी दो अलग-अलग युगों के प्रतीक माने जाते हैं। एक ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी, तो दूसरे ने 21वीं सदी के भारत में लंबे समय तक सत्ता का नेतृत्व किया। ऐसे में दोनों नेताओं की तुलना हमेशा राजनीतिक बहस का विषय बनी रहेगी।
फिलहाल, प्रधानमंत्री मोदी के रिकॉर्ड को लेकर जहां भाजपा उत्साहित है, वहीं विपक्ष इसे उपलब्धियों और विरासत के व्यापक संदर्भ में देखने की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।
