पवन सिंह की एंट्री से बढ़ी कुशवाहा की मुश्किलें

बिहार की राजनीति में एक बार फिर भोजपुरी स्टार और नेता पवन सिंह चर्चा के केंद्र में हैं. विधान परिषद चुनाव के लिए बीजेपी के उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और उनके बेटे दीपक प्रकाश पर पड़ा है.
दीपक प्रकाश की उम्मीदों को झटका
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी. राजनीतिक जानकारों का मानना था कि खाली सीटों में से एक सीट उन्हें मिल सकती है. लेकिन बीजेपी ने पवन सिंह को उम्मीदवार बनाकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया. इससे दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं.
मंत्री पद पर भी मंडरा रहा खतरा
दीपक प्रकाश फिलहाल मंत्री हैं, लेकिन वे विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. संविधान के अनुसार मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है. ऐसे में यदि उन्हें जल्द कोई अवसर नहीं मिलता, तो उनका मंत्री पद भी संकट में पड़ सकता है.
NDA में बढ़ सकती है बेचैनी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के इस कदम ने उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति को असहज बना दिया है. उनकी पार्टी के भीतर पहले से असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं. ऐसे में यदि वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हैं, तो पार्टी के विधायकों को साथ रखना भी चुनौती बन सकता है.
आगे क्या करेंगे उपेंद्र कुशवाहा?
बिहार की राजनीति तेजी से बदल रही है. बीजेपी अब कुशवाहा समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नए चेहरों को आगे बढ़ा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपेंद्र कुशवाहा NDA के साथ बने रहेंगे या आने वाले दिनों में कोई नई राजनीतिक रणनीति अपनाएंगे.
