राज्यराजनीति

गुरु ग्रंथ साहिब एक्ट पर भड़की SGPC. सरकार के खिलाफ बड़ा पंथक एक्शन

पंजाब में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार संशोधन एक्ट 2026’ को लेकर नया विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee ने इस कानून की कुछ धाराओं पर गंभीर आपत्ति जताते हुए 31 मई को गुरुद्वारा श्री बाबा बकाला साहिब में विशाल पंथक सम्मेलन बुलाने का फैसला किया है। एसजीपीसी का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए संशोधन सिख धार्मिक परंपराओं और मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं। इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति और धार्मिक संगठनों में नई बहस शुरू हो गई है। एसजीपीसी प्रमुख एडवोकेट Harjinder Singh Dhami ने अमृतसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह मामला केवल कानून का नहीं बल्कि करोड़ों सिख श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग जगहों पर हुई पंथक बैठकों में सिख संगठनों और विद्वानों ने एक बड़े सम्मेलन की मांग रखी थी जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

सरकार पर बिना सलाह कानून बनाने का आरोप

एसजीपीसी ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने इतना बड़ा धार्मिक कानून बनाने से पहले न तो श्री अकाल तख्त साहिब से सलाह ली और न ही एसजीपीसी को ड्राफ्ट दिखाया। कमेटी का कहना है कि सिख धर्म से जुड़े मामलों में हमेशा परंपरा के अनुसार धार्मिक संस्थाओं से राय ली जाती रही है लेकिन इस बार सरकार ने सीधे संशोधन लागू कर दिया। एसजीपीसी ने विशेष रूप से एक्ट में इस्तेमाल किए गए “कस्टोडियन” शब्द और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों की जानकारी सार्वजनिक वेबसाइट पर डालने वाले प्रावधान पर सवाल उठाए हैं। कमेटी का मानना है कि इससे सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं और धार्मिक गरिमा प्रभावित हो सकती है। धामी ने कहा कि बेअदबी के मामलों में सख्त सजा देने का एसजीपीसी समर्थन करती है लेकिन कानून की भाषा और कुछ नियम धार्मिक भावनाओं के खिलाफ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मामलों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी।

गुरु ग्रंथ साहिब एक्ट पर भड़की SGPC. सरकार के खिलाफ बड़ा पंथक एक्शन

पंथक सम्मेलन में जुटेंगे बड़े सिख संगठन

एसजीपीसी ने साफ किया है कि 31 मई को होने वाला सम्मेलन किसी टकराव के लिए नहीं बल्कि सिख समुदाय की भावनाओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने के उद्देश्य से बुलाया गया है। इस सम्मेलन में दमदमी टकसाल. निहंग सिंह दलों. निर्मला और उदासी संप्रदायों समेत कई बड़ी सिख जत्थेबंदियों को आमंत्रित किया गया है। एसजीपीसी को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में संगत इस कार्यक्रम में पहुंचेगी और एक्ट के विवादित प्रावधानों पर अपनी राय रखेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मेलन आने वाले दिनों में पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। खास बात यह है कि एसजीपीसी ने यह भी याद दिलाया कि पहले जब भी सिख गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन हुए तब कमेटी की सहमति और सुझाव शामिल किए गए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ जिससे सिख संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पंजाब सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है।

धार्मिक भावनाओं और राजनीति के बीच बढ़ा तनाव

इस पूरे विवाद ने पंजाब में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को काफी गर्म कर दिया है। एक तरफ सरकार कानून को गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान और सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है तो दूसरी ओर एसजीपीसी इसे धार्मिक मर्यादा में दखल मान रही है। धामी ने कहा कि एसजीपीसी के पास पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आधुनिक व्यवस्था मौजूद है। हर स्वरूप देने से पहले संबंधित गुरुद्वारे की जांच की जाती है और सुरक्षा व्यवस्था भी देखी जाती है। ऐसे में नए कानून की कुछ धाराएं अनावश्यक और विवाद पैदा करने वाली लगती हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि धार्मिक मामलों में अड़ियल रवैया छोड़कर सिख संस्थाओं से बातचीत की जाए। अब 31 मई का पंथक सम्मेलन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पंजाब की राजनीति और सिख समुदाय की भावनाओं का बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

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