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रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा कदम, पानी और सीवर चार्ज में ऐतिहासिक बदलाव

दिल्ली सरकार ने जल और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। इस नई नीति के तहत आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को 50 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी। इसके अलावा जिन संस्थागत और व्यावसायिक संपत्तियों में जीरो सीवरेज डिस्चार्ज Zero Liquid Discharge प्रणाली और मानकों के अनुरूप एसटीपी संचालित है उन्हें भी 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। हालांकि यदि यह प्रणाली बंद या निष्क्रिय पाई जाती है तो छूट समाप्त कर प्रतिदिन 0.5 प्रतिशत पेनल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है।

वास्तविक जरूरत के आधार पर नया चार्ज मॉडल

मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने बताया कि अब पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज केवल वास्तविक जल आवश्यकता के आधार पर लगाया जाएगा। पहले यह शुल्क पूरे परिसर के आधार पर तय होता था जिससे कई लोगों पर अतिरिक्त भार पड़ता था। अब यह नियम केवल नए या अतिरिक्त निर्माण पर लागू होगा। यदि किसी भवन का पुनर्निर्माण होता है और जल आवश्यकता में कोई वृद्धि नहीं होती तो उस स्थिति में दोबारा शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनेगी।

रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा कदम, पानी और सीवर चार्ज में ऐतिहासिक बदलाव

कॉलोनियों और क्षेत्रों को मिली अलग-अलग छूट

नई नीति के तहत नॉन एफएआर और खुले क्षेत्रों को चार्ज से बाहर रखा गया है। ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों में आईएफसी चार्ज पर 50 प्रतिशत और जी तथा एच श्रेणी की कॉलोनियों में 70 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। यह शुल्क केवल 200 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड वाली संपत्तियों पर लागू होगा। इसके साथ ही अनधिकृत कॉलोनियों में पंजीकृत वास्तुकार द्वारा अनुमोदित नक्शों को भी मान्यता दी जाएगी जिससे लोगों को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में आसानी मिलेगी।

नई नीति से शुल्क में भारी कमी का दावा

सरकार ने दावा किया है कि नई नीति के लागू होने से इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में बड़ी कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर ए और बी श्रेणी की 300 एफएआर वाली चार मंजिला संपत्ति पर पहले लगभग 13.18 लाख रुपये का शुल्क लगता था जो अब घटकर 5.4 लाख रुपये रह जाएगा। ई और एफ श्रेणी में यह लगभग 2.7 लाख और जी व एच श्रेणी में 1.62 लाख रुपये रह जाएगा। वहीं 1000 वर्ग मीटर की औद्योगिक संपत्ति पर पहले 57.67 लाख रुपये तक शुल्क लगता था जो अब घटकर 8.91 लाख रुपये रह जाएगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला नागरिकों को सरल और राहतभरी व्यवस्था देने के उद्देश्य से लिया गया है।

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