
बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परीक्षा में हो रही देरी और अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। तेजस्वी यादव ने इस पूरे मामले पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले युवाओं से बड़े-बड़े वादे करने वाली एनडीए सरकार अब अपनी ही मांगों को लेकर सड़क पर उतर रहे छात्रों पर सख्ती कर रही है।
पेपर लीक विरोध को बताया जायज. कार्रवाई पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि टीआरई-4 परीक्षा की मांग करना किसी भी तरह अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई पूरी तरह गलत है। तेजस्वी ने सवाल किया कि जब छात्र सिर्फ अपनी भर्ती और परीक्षा की मांग कर रहे हैं तो उनके खिलाफ लाठीचार्ज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर नौकरी देने के वादे किए गए थे लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह अलग है और युवाओं को केवल आश्वासन मिल रहे हैं।

रोजगार वादों पर सरकार को घेरा. भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर रोजगार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक करोड़ नौकरियों का वादा किया था लेकिन अब अभ्यर्थियों को भर्ती शुरू होने का इंतजार करना पड़ रहा है। तेजस्वी ने कहा कि राज्य में अपराध और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ रही हैं लेकिन सरकार का ध्यान युवाओं की मांगों को दबाने पर है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस बल का उपयोग करना ही है तो उसे अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ इस्तेमाल किया जाना चाहिए न कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर।
टीआरई-4 प्रक्रिया में देरी पर सरकार की मंशा पर सवाल
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि टीआरई-4 भर्ती प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 और 2025 बीत जाने के बावजूद अब तक भर्ती की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके 17 महीने के शासन में बिना पेपर लीक के दो बड़ी शिक्षक भर्तियां पूरी कराई गई थीं और लाखों पदों पर प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
