
बिहार की राजनीति में जाति और एनकाउंटर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में बयान दिया था कि राज्य में जाति देखकर एनकाउंटर किए जा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और सत्ता पक्ष लगातार प्रतिक्रिया दे रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुके हैं और अब यह मामला और तेज होता जा रहा है।
जीतन राम मांझी का आरजेडी पर सीधा हमला
इस बहस में अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरजेडी से कई सवाल पूछे। मांझी ने कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती लेकिन उन्होंने आरजेडी से यह स्पष्ट करने को कहा कि बिहार में जेलों के अंदर एक ही जाति के 40 प्रतिशत बंदी क्यों हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है और विपक्षी दलों पर दबाव भी बढ़ा है।

जाति और जमीन कब्जे को लेकर गंभीर आरोप
जीतन राम मांझी ने अपने पोस्ट में आगे कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दलितों को मिली सरकारी जमीन पर कथित रूप से एक ही जाति के लोगों ने कब्जा कर रखा है और यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने यह भी पूछा कि दलित अत्याचार कानून के तहत दर्ज मामलों में भी एक ही जाति के लोगों की हिस्सेदारी अधिक क्यों है। इसके साथ ही उन्होंने कब्रिस्तान और वक्फ की जमीन पर कब्जे का मुद्दा भी उठाया और इसे लेकर आरजेडी से जवाब मांगा।
मांझी ने कहा अब जवाब देना होगा
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि अब इन सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अगर दलितों पर अत्याचार होता है तो वह लीला कहा जाता है और अगर जवाब दिया जाए तो चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दलित अब किसी से डरने वाले नहीं हैं और अगर जरूरत पड़ी तो करारा जवाब दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत और अधिक गर्मा गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।
