राजनीतिराज्य

पंजाब में सुरक्षा पर घमासान BJP कांग्रेस ने CM मान के बयान पर उठाए सवाल

जालंधर और अमृतसर में हुए ताजा धमाकों के बाद पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। घटनाओं के तुरंत बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के बयान ने इस विवाद को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इन घटनाओं के पीछे साजिश का संकेत दे रहा है वहीं विपक्ष इसे सरकार की विफलता करार दे रहा है। आम जनता के बीच भी इन घटनाओं को लेकर चिंता और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।

भाजपा नेताओं का सरकार पर तीखा हमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Sunil Jakhar ने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पाकिस्तान की आईएसआई की भूमिका की ओर इशारा कर रहे हैं तब मुख्यमंत्री का अलग रुख लेना कई शंकाएं पैदा करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे राजनीतिक बयानबाजी से बचें और जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें। वहीं भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य को संभालने में मौजूदा सरकार पूरी तरह विफल रही है। उनके अनुसार बीते वर्षों में राज्य में अपराध और हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

पंजाब में सुरक्षा पर घमासान BJP कांग्रेस ने CM मान के बयान पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने भी उठाए समन्वय पर सवाल

इस मुद्दे पर कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष Amarinder Singh Raja Warring ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति दोनों सरकारों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब गृह विभाग उनके पास है तो प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। कांग्रेस का मानना है कि सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा राजनीतिक एंगल

इन धमाकों के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं। पहले पुलिस थानों और अब केंद्रीय बलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक एंगल सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे सियासत और गर्म हो गई है। साफ है कि पंजाब में कानून व्यवस्था का मुद्दा अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने के आसार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button