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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की कानूनी मुश्किलें फिर क्यों हुईं तेज, सुप्रीम कोर्ट में नोटिस

पंचकूला स्थित नेशनल हेराल्ड प्लॉट आवंटन मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस केस में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत ने हुड्डा को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि मामला अब फिर से न्यायिक समीक्षा के केंद्र में आ गया है और इसका अंतिम परिणाम महत्वपूर्ण हो सकता है।

हाई कोर्ट के फैसले और केस बंद होने की स्थिति

फरवरी 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपितों ने कोई अपराध किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई प्रशासनिक निर्णय नीति या दिशा निर्देशों के विपरीत लिया गया हो तो केवल इसी आधार पर उसे भ्रष्टाचार या दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया गया था और पूरे मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद सीबीआई और ईडी की अदालतों ने भी केस को बंद कर दिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की कानूनी मुश्किलें फिर क्यों हुईं तेज, सुप्रीम कोर्ट में नोटिस

सीबीआई की दलील और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट के फैसले में गंभीर त्रुटियां हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि उपलब्ध सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। सीबीआई का दावा है कि भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध स्पष्ट रूप से बनता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल हैं ने सभी दलीलों को सुनने के बाद नोटिस जारी किया और मामले को फिलहाल खुला रखा है जिससे आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

जमीन आवंटन विवाद और जांच एजेंसियों के आरोप

यह पूरा विवाद पंचकूला के सेक्टर छह में स्थित प्लॉट नंबर सी सत्रह से जुड़ा है। यह जमीन पहले एसोसिएट्स जनरल्स लिमिटेड को नो प्रॉफिट नो लॉस आधार पर दी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने के कारण इसे 1996 में वापस ले लिया गया था। इसके बाद 2005 में जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे तब इस प्लॉट को फिर से पुराने दरों पर आवंटित किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पुनः आवंटन में नियमों का उल्लंघन हुआ और सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी और सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि मामला आगे बढ़ेगा या नहीं।

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