राज्यराजनीति

FCRA संशोधन पर ईसाई प्रतिनिधियों से मिले अमित शाह, संसद में जल्द पेश होगा विधेयक

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर संसद से पहले गतिविधियां तेज हो गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात कर उनकी चिंताओं और सुझावों पर चर्चा की। सरकार का कहना है कि विधेयक को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना आवश्यक है।

अमित शाह ने की प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात

संसद में प्रस्तावित FCRA विधेयक पेश होने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अलग-अलग हितधारकों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य विधेयक को लेकर उठ रही आशंकाओं को सुनना और संबंधित पक्षों के सुझावों पर चर्चा करना था।

मिजोरम के मुख्यमंत्री भी रहे मौजूद

पहली बैठक में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ईसाई समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्री से मिले। प्रतिनिधिमंडल में मिजोरम कोह्रान ह्मानावतुते कमेटी (MKHC) के अध्यक्ष रेव. जॉन रालदोसांगा और काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम (CCM) के महासचिव रेव. लाल्हमंगाइहा भी शामिल थे। प्रतिनिधियों ने विधेयक के कुछ प्रस्तावित प्रावधानों में बदलाव की मांग रखी।

‘पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा कानून’

बैठक के बाद मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बताया कि गृह मंत्री ने आश्वस्त किया है कि प्रस्तावित कानून को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक के 12 अगस्त को संसद में पेश होने की संभावना है, हालांकि अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया के अनुसार होगा।

FCRA संशोधन पर ईसाई प्रतिनिधियों से मिले अमित शाह, संसद में जल्द पेश होगा विधेयक

बिशप और पादरियों के प्रतिनिधिमंडल से भी चर्चा

इसके बाद ईसाई समुदाय के 10 बिशप और पादरियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी मौजूद रहे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और सुझावों को गंभीरता से सुना और उन पर आगे विचार करने का भरोसा दिया।

सरकार ने क्या कहा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, किसी भी विधेयक को संसद में चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। सरकार ने यह भी कहा कि वह संसद में उठने वाले सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है और गृह मंत्री बहस के दौरान विस्तृत जवाब देंगे।

सरकार का यह भी कहना है कि प्रस्तावित विधेयक की मूल संरचना वर्ष 2010 के FCRA कानून और उससे जुड़े प्रावधानों पर आधारित है। साथ ही, सरकार ने उन दावों को खारिज किया कि यह कानून किसी एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

FCRA से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर सरकार और विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद का दौर जारी है। संसद में विधेयक पेश होने के बाद इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल सरकार का कहना है कि सभी सुझावों और चिंताओं पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।

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