RTI से खुलासा: आधी कप चाय ₹450 की, एक किलोमीटर कार के लिए दिए ₹3000

भोपाल की बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह के खर्चों को लेकर RTI से सामने आई जानकारी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक आधी कप ब्लैक टी के लिए ₹450 और महज एक किलोमीटर की कार यात्रा के लिए ₹3000 का भुगतान किया गया। मामले में जांच और ऑडिट की मांग उठी है।
RTI से सामने आए चौंकाने वाले खर्च
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह अब अपने आयोजन से ज्यादा खर्चों को लेकर चर्चा में है। RTI के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार समारोह के दौरान कुछ ऐसे भुगतान किए गए, जिनकी रकम सामान्य खर्चों की तुलना में काफी अधिक बताई जा रही है।
दस्तावेजों में आधी कप ब्लैक टी यानी ‘कटिंग चाय’ के लिए ₹450 का भुगतान और करीब 1 किलोमीटर की कार यात्रा के लिए ₹3000 का बिल शामिल होने का दावा किया गया है।
इन बिलों के सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के वित्तीय प्रबंधन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यूनिवर्सिटी में ऑडिटोरियम के बावजूद बाहर कराया आयोजन
RTI से सामने आई जानकारी में एक अन्य खर्च भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया गया है कि बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी परिसर में खुद का बड़ा ऑडिटोरियम उपलब्ध होने के बावजूद दीक्षांत समारोह के लिए भोपाल के रविंद्र भवन का हॉल बुक किया गया।
इसके लिए करीब ₹2 लाख का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब यूनिवर्सिटी के पास आयोजन के लिए अपना परिसर और ऑडिटोरियम मौजूद था, तो बाहर से हॉल किराए पर लेने का निर्णय क्यों लिया गया और इसकी प्रशासनिक मंजूरी किस स्तर पर दी गई।

फाइनेंस कंट्रोलर की आपत्ति के बावजूद भुगतान का दावा
मामले में सामने आई जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यूनिवर्सिटी के फाइनेंस कंट्रोलर ने कथित तौर पर कुछ बिलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसके बावजूद संबंधित भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। यदि दस्तावेजों में दर्ज यह जानकारी सही है, तो भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय स्वीकृतियों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि, केवल RTI में सामने आए बिलों के आधार पर इसे कानूनी रूप से वित्तीय अनियमितता घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की जांच और ऑडिट जरूरी होगा।
RTI कार्यकर्ता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और RTI कार्यकर्ता धर्मेंद्र सिंह गौर ने इन खर्चों को सार्वजनिक करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उनकी मांग है कि दीक्षांत समारोह से जुड़े सभी बिलों का दोबारा ऑडिट कराया जाए और यदि नियमों के विपरीत भुगतान पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
छात्रों और शिक्षकों ने भी उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी से जुड़े छात्रों और प्रोफेसरों के बीच भी खर्चों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मांग उठाई जा रही है कि दीक्षांत समारोह पर हुए खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।
खास तौर पर चाय, वाहन, हॉल किराया और अन्य वीआईपी व्यवस्थाओं से जुड़े भुगतान की जानकारी सामने आने से पारदर्शिता का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
क्या वाकई हुई वित्तीय अनियमितता?
₹450 की चाय, ₹3000 प्रति किलोमीटर कार किराया और ₹2 लाख के हॉल किराए जैसे खर्च पहली नजर में असामान्य जरूर दिखाई देते हैं। लेकिन इन भुगतानों के पीछे कोई विशेष अनुबंध, सेवा शुल्क, पैकेज या अन्य प्रशासनिक प्रावधान था या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
इसलिए फिलहाल पूरे मामले को RTI में सामने आए कथित असामान्य भुगतान के रूप में देखा जाना चाहिए। अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र ऑडिट और सक्षम जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
