
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने संकेत दिए हैं कि उनका राजनीतिक समूह जल्द ही NCP(I) में विलय कर सकता है। उन्होंने कहा कि विलय के बाद NDA के साथ मिलकर राज्य में विकास कार्यों को गति देने पर ध्यान दिया जाएगा।
विलय को लेकर तेज हुई राजनीतिक हलचल
तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने NCP(I) में विलय की संभावना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर चर्चा जारी है और विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। उनके अनुसार दूसरी पार्टी ने उन्हें स्वीकार कर लिया है और स्वागत की इच्छा भी व्यक्त की है।

NDA के साथ मिलकर काम करने की तैयारी
काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करेंगी। उनका मानना है कि राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर समन्वय जरूरी है।
VIDEO | Delhi: Former TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar on merger with NCPI said,
"Let us first settle the matter of our bloc merging with another party. We have already received acceptance from them, and they are happy to welcome us. We will work together with the NDA under the… pic.twitter.com/OjylhwUcxD
— Press Trust of India (@PTI_News) June 16, 2026
केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर
पूर्व सांसद ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में कई योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सकीं। अब इस दिशा में गंभीर प्रयास करने और केंद्र की लाभकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा हो रही है।
बाल सुरक्षा और सामाजिक मुद्दे बने प्राथमिकता
काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि उनकी चर्चाओं में बाल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय भी शामिल रहे हैं। उनके अनुसार राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
सुवेंदु अधिकारी के साथ होगा समन्वय
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में विकास परियोजनाओं और केंद्रीय योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विपक्ष के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस दिशा में आगे की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। इससे विपक्षी दलों को नई ताकत मिल सकती है और राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर पड़ सकता है।
