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नरेश बाल्यान को कोर्ट से बड़ी राहत, उगाही केस में बरी; जांच और सबूतों पर उठे सवाल

आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को उगाही और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने और जांच में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

कोर्ट ने आरोपों से किया बरी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष नरेश बाल्यान के खिलाफ ऐसा गंभीर संदेह भी स्थापित नहीं कर सका, जिसके आधार पर उन पर आरोप तय किए जा सकें। इसी वजह से उन्हें एक्सटॉर्शन और आपराधिक षड्यंत्र सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

जांच में मिली कई बड़ी खामियां

अदालत ने कहा कि मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई। शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन जब्त नहीं किया गया, जबकि कथित रंगदारी कॉल उसी पर प्राप्त हुई थी। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो क्लिप्स का मूल स्रोत भी जांच एजेंसी स्थापित नहीं कर सकी।

नरेश बाल्यान को कोर्ट से बड़ी राहत, उगाही केस में बरी; जांच और सबूतों पर उठे सवाल

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी केवल पेन ड्राइव में ट्रांसफर की गई ऑडियो फाइलों पर निर्भर रही। मूल डिवाइस जब्त नहीं किए गए, न ही फाइलों की हैश वैल्यू, मेटाडेटा या चेन ऑफ कस्टडी को प्रमाणित किया गया। अदालत के अनुसार, ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता साबित नहीं हो सकी।

बचाव पक्ष की दलील को मिली मजबूती

नरेश बाल्यान के वकील ने दलील दी कि यदि विवादित ऑडियो फाइलों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाए तो उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं बचता। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी ने समय रहते सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री और उसके स्रोत की जांच नहीं की, जिससे मामले की अहम कड़ियां कमजोर पड़ गईं।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा कथित रूप से एक कारोबारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने से जुड़ा है। आरोप था कि नरेश बाल्यान इस कथित साजिश का हिस्सा थे। नवंबर 2024 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। बाद में उन्हें जमानत मिली, लेकिन उसी दिन उन्हें MCOCA के एक अन्य मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में कपिल सांगवान अब भी फरार है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला एक बार फिर दिखाता है कि आपराधिक मामलों में मजबूत और प्रमाणित साक्ष्य कितने जरूरी होते हैं। अदालत ने साफ किया कि केवल अधूरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या कमजोर जांच के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, फरार आरोपी कपिल सांगवान के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

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