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गोरखपुर में असलहा तस्करी नेटवर्क का खुलासा, 31 आरोपी नामजद; 26 की तलाश में STF

गोरखपुर में STF की कार्रवाई के बाद कथित असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। 14 सितंबर की रात विंध्यवासिनी पार्क के पास STF ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, तलाशी में चार पिस्टल, एक रिवॉल्वर, मैगजीन और कारतूस बरामद हुए।

 31 लोगों पर केस, 26 की तलाश

STF की जांच में इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 26 अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अजीत यादव, अभिषेक गौड़ उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी और राहुल गुप्ता के रूप में हुई है। सभी को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

गोरखपुर से बाहर तक जुड़े तार

पूछताछ के बाद जांच का दायरा गोरखपुर से आगे बढ़ गया है। STF के अनुसार, सामने आए नामों में गोरखपुर के अलावा देवरिया, महाराजगंज, संतकबीरनगर और कुशीनगर के लोग शामिल हैं। बिहार के बेतिया, मध्य प्रदेश और हरियाणा से जुड़े नाम भी जांच में सामने आए हैं। शशांक पांडेय की तलाश में STF की टीम बिहार स्थित उसके गांव तक पहुंची।

गोरखपुर में असलहा तस्करी नेटवर्क का खुलासा, 31 आरोपी नामजद; 26 की तलाश में STF

बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन की जांच

पुलिस इस नेटवर्क के कथित संबंध लॉरेंस बिश्नोई और उससे जुड़े गिरोहों से होने की भी जांच कर रही है। हालांकि, सामने आए आरोपों और संपर्कों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। STF का जोर यह पता लगाने पर है कि हथियारों की सप्लाई की कड़ी कहां से शुरू हुई और किन लोगों तक पहुंची।

 मोबाइल और बैंक खातों से खुलेगा नेटवर्क

जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की पड़ताल कर रही हैं। फोन नंबरों, डिजिटल संपर्कों और वित्तीय लेनदेन का मिलान किया जा रहा है। STF सोशल मीडिया अकाउंट भी खंगाल रही है, ताकि आरोपियों के संपर्क और गतिविधियों से जुड़े डिजिटल सुराग मिल सकें।

पुराने मामलों से भी मिलाए जा रहे तार

जांच केवल मौजूदा मामले तक सीमित नहीं है। STF पुराने आर्म्स एक्ट मामलों में बरामद हथियारों के स्रोतों का भी मिलान कर रही है। मकसद यह पता लगाना है कि कहीं पहले जब्त किए गए हथियारों का संबंध इसी नेटवर्क से तो नहीं था। इसी आधार पर हथियारों के स्रोत से लेकर संभावित खरीदारों तक पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

अब आगे क्या?

फिलहाल STF के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार 26 आरोपियों तक पहुंचना और कथित नेटवर्क की वास्तविक संरचना स्पष्ट करना है। अलग-अलग जिलों और राज्यों में दबिश के साथ डिजिटल और वित्तीय जांच भी जारी है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों और जांच से इस नेटवर्क की भूमिका और विस्तार को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।

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