फर्जी सैलरी स्टेटमेंट से लाखों की नौकरी, ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने कानपुर से आरोपी दबोचा

ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने कानपुर के 43 वर्षीय देवेंद्र कुमार दुबे को कथित तौर पर फर्जी सैलरी स्टेटमेंट और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के जरिए ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंचा पद और भारी वेतन हासिल करने के मामले में गिरफ्तार किया है। कंपनी के फाइनल सेटलमेंट के दौरान दस्तावेजों की जांच में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे हासिल की बड़ी नौकरी
ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऊंची पोस्ट हासिल की।
आरोपी की पहचान देवेंद्र कुमार दुबे (43) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, उसने एक निजी ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी हासिल करने के लिए लैंडमार्क ग्रुप में काम करने का कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और सैलरी स्टेटमेंट जमा किया था।

2.80 लाख रुपये मासिक सैलरी का दिखाया रिकॉर्ड
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित फर्जी दस्तावेज में अपनी पिछली मासिक सैलरी 2,80,670 रुपये बताई थी। इसी आधार पर उसे कंपनी में बेहतर वेतन पैकेज और वरिष्ठ पद हासिल करने में मदद मिली।
अगस्त 2025 में उसे श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट का पद दिया गया। कंपनी अनंत टोयोटा के नाम से जानी जाती है। बाद में उसे ग्रुप CEO (After Sales) की जिम्मेदारी भी दी गई।
मई 2026 में अचानक दिया इस्तीफा
पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र कुमार ने मई 2026 में अचानक कंपनी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कंपनी उसके फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू कर रही थी।
इसी दौरान उसके पुराने रोजगार और वेतन से जुड़े दस्तावेजों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराया गया। जांच के दौरान कंपनी को कथित तौर पर पता चला कि लैंडमार्क ग्रुप में काम करने का अनुभव प्रमाण पत्र वास्तविक नहीं था।
इसके साथ ही 2,80,670 रुपये मासिक वेतन का जो बैंक स्टेटमेंट कंपनी में जमा कराया गया था, उसकी प्रामाणिकता पर भी सवाल सामने आए।
लैंडमार्क ग्रुप में नौकरी का दावा निकला गलत
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि देवेंद्र कुमार ने लैंडमार्क ग्रुप में नौकरी करने का जो अनुभव दिखाया था, वह वास्तविक नहीं था। HR स्तर पर सत्यापन के दौरान कंपनी को बताया गया कि आरोपी ने वहां नौकरी नहीं की थी।
पुलिस के अनुसार, कथित फर्जी बैंक स्टेटमेंट पर आरोपी के हस्ताक्षर भी पाए गए। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कंपनी से अधिक वेतन पैकेज हासिल करने के लिए किया गया।
कंपनी की ओर से शिकायत मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
अगस्त 2026 में दर्ज हुआ फ्रॉड का केस
पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर अगस्त 2026 में देवेंद्र कुमार के खिलाफ कथित धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज किया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच उसकी तलाश कर रही थी।
जांच टीम ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे ग्वालियर लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।
फर्जीवाड़े में और कौन शामिल?
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी सैलरी स्टेटमेंट और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट तैयार कैसे किए गए।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने ये दस्तावेज खुद तैयार किए थे या किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की मदद ली थी। इसके अलावा जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि अगर दस्तावेज फर्जी थे तो कंपनी के शुरुआती भर्ती और सत्यापन चरण में उनकी पुष्टि क्यों नहीं हो पाई।
नौकरी में दस्तावेज सत्यापन पर उठे सवाल
यह मामला निजी कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के दौरान किए जाने वाले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के महत्व को भी सामने लाता है। खास तौर पर जब किसी उम्मीदवार की पिछली नौकरी और वेतन के आधार पर नए पद और पैकेज का निर्धारण किया जाता है, तब दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और कथित फर्जी दस्तावेजों के स्रोत तथा संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
