लखनऊ में 68,500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का धरना, रक्त से लिखे पत्रों ने खींचा ध्यान

लखनऊ का ईको गार्डन एक बार फिर शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 में आरक्षण से जुड़े विवाद को लेकर अभ्यर्थी लगातार धरना दे रहे हैं। सितंबर की शुरुआत से आंदोलन के अलग-अलग चरणों में अभ्यर्थियों ने शासन तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए प्रदर्शन भी किए हैं।
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर अलग अंदाज में प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को अलग तरीके से सामने रखा। अभ्यर्थियों ने रक्तदान किया और उनके मुताबिक उसी रक्त से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा। इसके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के नाम भी पत्र भेजे गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह कदम उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग की गंभीरता दिखाने का प्रतीक है।
खून से लिखे पत्र में क्या मांग?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद का समाधान है। वे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुपालन की मांग कर रहे हैं। जुलाई 2026 में आयोग ने अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखते हुए OBC अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में पांच प्रतिशत छूट देने और 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत पर पात्र अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानने की बात कही थी।

आठ साल पुराना विवाद फिर चर्चा में
68,500 शिक्षक भर्ती का मामला 2018 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आरक्षण और अर्हता अंकों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग की संस्तुति लागू होने से उन उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है, जो आरक्षित वर्ग से संबंधित हैं। दूसरी ओर, इस मामले में सरकारी स्तर पर आगे की कार्रवाई को लेकर अभ्यर्थी लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आंदोलन कब खत्म होगा?
अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले भी वे बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास तक प्रदर्शन कर चुके हैं और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेजा था।
अब फैसले का इंतजार
शिक्षक भर्ती का यह विवाद केवल नौकरी की उम्मीद से जुड़ा मामला नहीं रह गया है। वर्षों से परिणाम और नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह उनके भविष्य का सवाल है। अब निगाहें सरकार और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। आयोग की संस्तुति पर क्या निर्णय होता है, यही आगे के आंदोलन की दिशा भी तय करेगा।
