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SIR विवाद पर हिमंता सरमा का बड़ा हमला ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया का विरोध बिना किसी ठोस कारण के किया जा रहा है। सरमा के मुताबिक इस प्रक्रिया का उद्देश्य देश के असली नागरिकों के नाम जोड़ना और अवैध घुसपैठियों को हटाना है। कालिम्पोंग में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि यह कदम चुनावी पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

नागरिकता और घुसपैठ के मुद्दे पर बढ़ी सियासी तकरार

सरमा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार घुसपैठ के मुद्दे पर ढीला रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि “ममता दीदी ने घुसपैठियों के लिए दरवाजे खुले रखे हैं,” जिससे राज्य की जनसांख्यिकी पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि SIR के जरिए भारतीय नागरिकों को उनका हक मिलेगा जबकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर किया जाएगा। इस बयान ने नागरिकता और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

SIR विवाद पर हिमंता सरमा का बड़ा हमला ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप

कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला, महिला मुद्दे पर उठाए सवाल

इस दौरान सरमा ने कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद में जिस तरह महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष ने व्यवहार किया, वह महिलाओं का अपमान है। सरमा के मुताबिक इस मुद्दे पर देश की महिलाओं में गुस्सा है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिलाओं के सम्मान को लेकर गंभीर नहीं हैं और यही कारण है कि जनता का भरोसा उनसे लगातार कम हो रहा है।

महिला आरक्षण बिल विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

संसद में संविधान संशोधन से जुड़े महिला आरक्षण बिल के पास न हो पाने के बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर महिलाओं के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे माहौल में हिमंता बिस्वा सरमा के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में किस तरह का असर डालता है और जनता किस पक्ष के तर्कों को ज्यादा महत्व देती है।

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