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दतिया सीट पर बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला, चुनावी इतिहास और जातीय गणित समझिए

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 13 जुलाई नामांकन का अंतिम दिन है। भारतीय जनता पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। बहुजन समाज पार्टी ने लोकेंद्र नेता जी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने दामोदर सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा है। सभी दलों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है और चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है।

उपचुनाव क्यों हो रहा है?

दतिया सीट पर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था। हालांकि, इसी वर्ष अप्रैल में एक मामले में अदालत द्वारा राजेंद्र भारती को दो वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसी कारण यह सीट रिक्त हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।

दतिया सीट पर बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला, चुनावी इतिहास और जातीय गणित समझिए

दतिया सीट का चुनावी इतिहास

दतिया विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1977, 1980 और 1985 में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की। 1990 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 1993 में कांग्रेस ने वापसी की, जबकि 1998 में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। 2003 में कांग्रेस फिर सत्ता में लौटी, लेकिन 2008, 2013 और 2018 में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा लगातार विजेता रहे। वर्ष 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा का यह सिलसिला तोड़ते हुए जीत दर्ज की।

जातीय समीकरण तय करेंगे चुनाव की दिशा

दतिया विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता सबसे प्रभावशाली हैं, जिनकी संख्या 58 से 60 हजार के बीच मानी जाती है। इनमें जाटव और अहिरवार समाज के लगभग 33 से 40 हजार वोटर शामिल हैं। इसके अलावा ब्राह्मण मतदाता लगभग 33 से 35 हजार, कुशवाह समाज 28 से 30 हजार, यादव और ठाकुर समाज के 14 से 18 हजार, वैश्य समुदाय के 12 से 15 हजार, मुस्लिम मतदाता 7 से 8 हजार, जबकि अन्य ओबीसी मतदाताओं की संख्या 15 से 20 हजार के बीच आंकी जाती है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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