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संजय झील के कायाकल्प में तेजी, एलजी संधू ने दिए बड़े निर्देश

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने गुरुवार को पूर्वी दिल्ली स्थित संजय झील का दौरा कर पुनर्जीवन परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। 52 एकड़ में फैली झील और इसके आसपास के 165 एकड़ संरक्षित वन क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वरिष्ठ अधिकारियों ने चरणबद्ध कार्ययोजना भी प्रस्तुत की।

जल आपूर्ति बहाल करने के दिए निर्देश

निरीक्षण के दौरान एलजी ने झील में पानी की कमी पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को डल्लूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि झील का जलस्तर बनाए रखना और इसे टिकाऊ ‘ब्लू-ग्रीन एसेट’ के रूप में विकसित करना बेहद जरूरी है।

संजय झील के कायाकल्प में तेजी, एलजी संधू ने दिए बड़े निर्देश

पहले चरण में होंगे ये अहम काम

एलजी ने झील से खरपतवार और शैवाल हटाने, जियोटेक्सटाइल तकनीक से तटबंध मजबूत करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में बायो-स्वेल्स विकसित करने के कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। अगस्त 2026 तक पहले चरण में पैदल मार्गों की मरम्मत, झील के तल की सफाई और आसपास के ठहरे हुए पानी को झील तक पहुंचाने की व्यवस्था पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

दूसरे चरण में बढ़ेगा सौंदर्य और जल गुणवत्ता

मई 2027 तक प्रस्तावित दूसरे चरण में झील के जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए बायो-रिमेडिएशन, घुलित ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए एरेटर और फव्वारों की स्थापना की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त बायो-स्वेल्स और जल प्रवाह व्यवस्था का विस्तार भी किया जाएगा, जिससे झील का पारिस्थितिक संतुलन बेहतर हो सके।

5,000 देशी पेड़ लगाने की तैयारी

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एलजी ने पूरे क्षेत्र में 5,000 देशी प्रजातियों के पेड़ लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए नीम, अर्जुन, अशोक, पिलखन, कनेर, टेकोमा और अन्य देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही सीएसआर और स्थानीय आरडब्ल्यूए की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया गया।

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