
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी बिसात तेजी से बदल रही है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। इसी बीच अरुण भारती की अमित शाह से मुलाकात ने NDA के भीतर संभावित तालमेल और सीट बंटवारे की चर्चाओं को हवा दे दी है।
अमित शाह से अरुण भारती की मुलाकात
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जमुई सांसद और यूपी प्रभारी अरुण भारती ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई।
इस मुलाकात को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि LJP(RV) ने यूपी में संगठन विस्तार और चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी पहले ही प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात कह चुकी है।
‘पंडित-पासी-पासवान’ नारे पर जोर
अरुण भारती की यूपी रणनीति में सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। पार्टी ‘पंडित-पासी-पासवान’ नारे के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अरुण भारती ने जुलाई में कहा था कि पार्टी पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।

शुरुआत में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान
LJP(RV) ने फिलहाल यूपी में अपने दम पर चुनावी तैयारी का संकेत दिया है। पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने पर जोर दे रही है।
हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर LJP(RV) NDA का हिस्सा है। ऐसे में यूपी में पार्टी की स्वतंत्र तैयारी के बावजूद भाजपा के साथ संभावित तालमेल की चर्चाएं राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
क्या BJP-LJP में हो सकता है सीट समझौता?
अरुण भारती और अमित शाह की मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और LJP(RV) के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
अभी तक किसी सीट बंटवारे को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित राजनीतिक संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन चुनाव से पहले सहयोगी दलों के बीच सीट और सामाजिक समीकरणों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
यूपी में बढ़ रही चिराग की पार्टी की सक्रियता
LJP(RV) की बढ़ती गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि चिराग पासवान की पार्टी यूपी में अपनी पहचान को विस्तार देना चाहती है। 403 सीटों पर तैयारी का दावा और ‘पंडित-पासी-पासवान’ जैसे सामाजिक संदेश इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी अकेले मैदान में उतरती है या चुनाव नजदीक आने पर NDA के भीतर कोई नया राजनीतिक फॉर्मूला सामने आता है।
आगे की राजनीति पर रहेगी नजर
अमित शाह से अरुण भारती की मुलाकात ने यूपी की चुनावी राजनीति में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। LJP(RV) अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है, जबकि BJP के लिए सहयोगी दलों के सामाजिक प्रभाव और सीटों की रणनीति अहम हो सकती है।
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि 2027 के यूपी चुनाव में NDA के भीतर सीटों और सामाजिक समीकरणों की बातचीत आने वाले महीनों में और तेज हो सकती है।
