
दिल्ली के करोल बाग में दिनदहाड़े हुई चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्वेलरी कारोबारी रेस्टोरेंट में खाना खाने गए और पीछे कार में रखे करोड़ों के गहने बदमाशों ने पार कर दिए। महज कुछ समय में हुई इस वारदात ने कारोबारी को सदमे में डाल दिया।
मार्केटिंग के लिए दिल्ली पहुंचे थे कारोबारी
पीड़ित कन्हैया लाल ‘SKG Kundan Crafts’ नाम से आभूषण का कारोबार करते हैं। वह 18 अगस्त को अपने बेटे ध्रुव सोनी और एक कर्मचारी के साथ कारोबारी मार्केटिंग के सिलसिले में दिल्ली पहुंचे थे।
उनके पास तीन बैकपैक और एक सूटकेस था। बैग में सोने और हीरे की ज्वेलरी के अलावा लैपटॉप और आधार कार्ड रखा था। सूटकेस में कपड़े बताए गए हैं।
ग्रेटर कैलाश के बाद पहुंचे करोल बाग
19 अगस्त को कारोबारी ने ग्रेटर कैलाश के एम ब्लॉक मार्केट में कई ज्वेलर्स से मुलाकात की। इसके बाद शाम करीब चार बजे वह करोल बाग पहुंचे।
करीब साढ़े पांच बजे उन्होंने अपनी कार आर्य समाज रोड पर केनरा बैंक के सामने पार्क की। इसके बाद वह बेटे और कर्मचारी के साथ पास के बीकानेरवाला रेस्टोरेंट में खाना खाने चले गए।

डेढ़ घंटे में करोड़ों का माल साफ
कारोबारी जब शाम करीब 7:15 बजे वापस लौटे तो उनके होश उड़ गए। कार का पिछला शीशा टूटा हुआ था और अंदर रखे तीन बैकपैक के साथ कपड़ों वाला सूटकेस भी गायब था।
बैग में रखे सोने और हीरे के गहनों की कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। बदमाशों ने बेहद कम समय में वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए।
CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास की दुकानों, सड़कों और प्रतिष्ठानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।
जांच टीम संदिग्धों के साथ-साथ उन वाहनों की भी पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिनका इस्तेमाल वारदात के दौरान किया गया हो सकता है।
कारोबारी के लिए बड़ा झटका
आभूषण कारोबार में करोड़ों रुपये का माल लेकर अलग-अलग बाजारों में जाना सामान्य कारोबारी गतिविधि हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी रकम के गहने कार में छोड़ना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा साबित हुआ।
घटना ने करोल बाग जैसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके में वाहन सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
अब पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों तक पहुंचने के साथ चोरी हुए गहनों की बरामदगी है। CCTV फुटेज, संभावित भागने के रास्तों और दूसरे तकनीकी सुरागों की मदद से जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
करोल बाग की यह वारदात बताती है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में भी अपराधी मौका मिलते ही बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। अब सबकी नजर पुलिस की जांच और उस सुराग पर है, जो करोड़ों की इस चोरी का राज खोल सकेगा।
