राज्य

बलौदा बाजार में 8 संदिग्ध मौतों से हड़कंप, तांत्रिक बलि की आशंका

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के खर्वे गांव में हुई आठ संदिग्ध मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बीते कुछ महीनों में एक के बाद एक हुई इन मौतों ने ग्रामीणों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गांववालों का दावा है कि ये सामान्य मौतें नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। इसी आशंका के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण कसडोल थाने पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस को ज्ञापन सौंपा।

अंधविश्वास और कथित खजाने की कहानी

ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार, गांव के एक किराना कारोबारी को किसी तांत्रिक या अंधविश्वास से जुड़े व्यक्ति ने यह विश्वास दिलाया था कि नदी किनारे जमीन के नीचे सोने से भरा घड़ा दबा हुआ है। कथित तौर पर उसे यह भी बताया गया कि उस खजाने को पाने के लिए 21 लोगों की बलि देनी होगी। ग्रामीणों का दावा है कि आठ मौतें इसी कथित अंधविश्वास से जुड़ी हो सकती हैं और यदि समय रहते मामला सामने नहीं आता, तो और भी जानें जा सकती थीं।

एक युवक के बचने से खुला राज

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब गांव का युवक कार्तिक कुमार कथित तौर पर मौत के मुंह से वापस लौट आया। कार्तिक ने बताया कि उसने आरोपी के घर पर शराब पी थी, जिसका स्वाद असामान्य रूप से कड़वा था। कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे गंभीर हालत में रायपुर रेफर करना पड़ा। तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद जब वह स्वस्थ हुआ, तो उसने अपने अनुभव की जानकारी ग्रामीणों और पुलिस को दी। इसके बाद पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई।

बलौदा बाजार में 8 संदिग्ध मौतों से हड़कंप, तांत्रिक बलि की आशंका

कब्र से निकाले जा रहे शव

ग्रामीणों की शिकायत और सामने आए तथ्यों को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने गांव पहुंचकर मृतकों के शव कब्र से निकालने की प्रक्रिया शुरू की। अब तक सात शवों को निकालकर पोस्टमार्टम, विसरा परीक्षण और टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मौतों के पीछे कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं था।

पुलिस हिरासत में संदिग्ध

पुलिस ने संदेह के आधार पर एक किराना कारोबारी और उसके कुछ परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। हालांकि आरोपी पक्ष ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

सच का इंतजार, गांव की निगाहें जांच पर

खर्वे गांव की यह घटना केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि अंधविश्वास, सामाजिक जागरूकता और कानून व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल बन गई है। फिलहाल पूरे गांव की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला प्रदेश के सबसे सनसनीखेज मामलों में शामिल हो सकता है। वहीं यदि सच्चाई कुछ और निकली, तो भी इन मौतों के पीछे का रहस्य सामने आना बेहद जरूरी है। सच चाहे जो भी हो, खर्वे गांव अब जवाब चाहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button