राज्यराजनीति

RSS फंडिंग को लेकर कांग्रेस नेता की मांग, निर्मला सीतारमण से की जांच की अपील

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यप्रणाली, रजिस्ट्रेशन और फंडिंग व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीहोर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संघ की संरचना और आर्थिक गतिविधियों की जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े संगठन की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में किसी भी बड़े संगठन, समिति या संस्था के लिए पंजीकरण, सदस्यता रिकॉर्ड और बैंकिंग व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है। उन्होंने दावा किया कि RSS का कोई आधिकारिक पंजीयन नहीं है और इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि संगठन के पास आने वाले धन का लेखा-जोखा किस व्यवस्था के तहत रखा जाता है। उनका कहना है कि इस विषय पर स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्य सार्वजनिक रूप से सामने आ सकें।

मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया

RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस तर्क पर भी दिग्विजय सिंह ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि हिंदू धर्म का कोई पंजीयन नहीं होता। कांग्रेस नेता ने कहा कि धर्म और संगठन दोनों अलग-अलग विषय हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से अस्तित्व में है, लेकिन आधुनिक संस्थाओं और संगठनों के संचालन के लिए नियम-कानून अलग होते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने संघ के संगठनात्मक ढांचे को लेकर सवाल उठाए।

RSS फंडिंग को लेकर कांग्रेस नेता की मांग, निर्मला सीतारमण से की जांच की अपील

चंपत राय और राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया अलग हो सकती है, लेकिन दिग्विजय सिंह के बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

वित्त मंत्री से जांच कराने की मांग

राज्यसभा सांसद ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संबोधित मांग में RSS को मिलने वाले दान और चंदे की जांच की आवश्यकता बताई। उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यदि संगठन करोड़ों रुपये की समाजसेवा गतिविधियां संचालित करता है, तो उसके वित्तीय स्रोतों और खर्चों की पारदर्शिता भी सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों की तरह बड़े संगठनों के वित्तीय रिकॉर्ड पर भी जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

बहस का केंद्र बनी पारदर्शिता

दिग्विजय सिंह के बयान ने RSS, उसके वित्तीय ढांचे और पारदर्शिता को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा या किसी व्यापक चर्चा का विषय बनेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग हमेशा महत्वपूर्ण रही है, और यही इस पूरे विवाद का केंद्रीय बिंदु बनकर उभरा है।

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