
सोनीपत के मॉडल टाउन स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में बच्चों से सफाई कराने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सफाई कर्मचारियों ने स्कूल पहुंचकर विरोध किया और हेडमास्टर पर गंभीर आरोप लगाए। धरना शुरू होने के बाद मामला बढ़ा, लेकिन हेडमास्टर की माफी के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
बच्चों से सफाई कराने पर शुरू हुआ विवाद
सोनीपत के मॉडल टाउन स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में उस समय हंगामा हो गया, जब स्कूल परिसर के बाहर बच्चों से सफाई कराई जा रही थी। सफाई कर्मचारियों को इसकी जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और पूरे मामले का वीडियो बनाया।
उन्होंने बच्चों से सफाई करवाने पर आपत्ति जताई और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इसके बाद मामला विरोध और धरने तक पहुंच गया।
हेडमास्टर पर लगाए गंभीर आरोप
सफाई कर्मचारियों ने स्कूल के हेडमास्टर सुरेंद्र हुड्डा और शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि बच्चों से स्कूल की सफाई कराई जाती है।

कर्मचारियों ने हेडमास्टर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि उनके बच्चों से सफाई का काम करवाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
स्कूल पहुंचकर जताया विरोध
विरोध कर रहे सफाई कर्मचारियों ने स्कूल पहुंचकर हेडमास्टर से भी सफाई करवाई। इसके बाद वे स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी मुख्य मांग हेडमास्टर से माफी मांगने की थी। धरने के कारण स्कूल परिसर के आसपास कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
हेडमास्टर ने मांगी माफी, हुआ समझौता
विवाद बढ़ने के बाद स्कूल के हेडमास्टर ने सफाई कर्मचारियों से माफी मांगी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर दिया।
इस तरह मामला फिलहाल शांत हो गया, लेकिन बच्चों से स्कूल की सफाई कराने और लगाए गए जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
हेडमास्टर ने दी अपनी सफाई
राजकीय माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर सुरेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार की तरफ से श्रमदान का आदेश दिया गया था। इसी के तहत स्कूल में सफाई अभियान चलाया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि सफाई कार्यक्रम में अध्यापकों के साथ बच्चों ने भी हिस्सा लिया था। इसी दौरान सफाई कर्मचारी स्कूल पहुंच गए और उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद धरना दिया गया और माफी की मांग रखी गई।
अब जांच और जिम्मेदारी का सवाल
मामला समझौते के बाद भले ही शांत हो गया हो, लेकिन स्कूल में बच्चों से सफाई कराने को लेकर उठे सवाल महत्वपूर्ण हैं। स्कूलों में स्वच्छता अभियान और श्रमदान का उद्देश्य बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना हो सकता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि बच्चों से कराए जाने वाले काम की प्रकृति और तरीके को लेकर स्पष्ट सीमाएं रहें।
वहीं जातिसूचक शब्दों के आरोप गंभीर हैं और यदि इनके संबंध में कोई शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा तथ्यों की जांच किया जाना जरूरी होगा। फिलहाल समझौते से विवाद थमा है, लेकिन घटना ने स्कूलों में बच्चों की भूमिका और सम्मानजनक कार्य वातावरण को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।
