
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। बीजेपी ने इस प्रदर्शन को लेकर तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने मार्च को राजनीतिक स्टंट बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।
गिरिराज सिंह बोले- जनता को परेशान करने की कोशिश
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तेजस्वी यादव के मार्च पर हमला करते हुए कहा कि झारखंड में छात्रों से जुड़े मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने चुप्पी साधी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अपनी राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने इस मामले पर खुलकर बात नहीं की। गिरिराज सिंह ने कहा कि बिहार में सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है, लेकिन राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अब सड़क पर उतरने की कोशिश की जा रही है।
‘मार्च की राजनीति बंद करें’: गिरिराज सिंह
गिरिराज सिंह ने कहा कि सड़कों पर प्रदर्शन करके आम जनता को परेशान करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव का यह कदम केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है। उन्होंने आरजेडी नेता से जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करने की अपील की।

संजय सरावगी ने भी साधा निशाना
बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मार्च जनसमर्थन दिखाने के बजाय तेजस्वी यादव के राजनीतिक करियर को बचाने की कोशिश है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन में न तो छात्रों का बड़ा समर्थन दिखा और न ही आम जनता की भागीदारी नजर आई।
युवाओं के मुद्दों पर बीजेपी ने घेरा
संजय सरावगी ने कहा कि बिहार के युवा रोजगार, बेहतर शिक्षा और विकास के अवसर चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की राजनीति अब वास्तविक मुद्दों से दूर होकर केवल विरोध प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई है।
‘जनता का भरोसा मार्च से नहीं मिलेगा’
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केवल मार्च निकालने और सरकार के खिलाफ नारे लगाने से जनता का विश्वास वापस हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं और शिक्षा के क्षेत्र में क्या काम किया, इसका जवाब जनता को देना चाहिए।
बिहार में तेज हुई राजनीतिक लड़ाई
तेजस्वी यादव का लोकभवन मार्च और उसके बाद बीजेपी का पलटवार बिहार की बढ़ती राजनीतिक गर्मी को दिखाता है।
आगामी चुनावों को देखते हुए दोनों प्रमुख दल जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि यह सियासी टकराव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है।
