
गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सियासी टकराव बढ़ गया। आरजेडी सांसद मनोज झा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। झा ने सरकार पर गांधी के विचारों से दूर जाने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने विपक्ष के चुनावी नतीजों के बाद EVM और SIR पर सवाल उठाने को लेकर पलटवार किया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, मनोज झा हिरासत में
2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसमें आरजेडी सांसद मनोज झा, AISA और अन्य छात्र एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारियों की मांग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवालों से जुड़ी थी।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दिन के दौरान करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
मनोज झा ने गांधी और गोडसे का जिक्र किया
हिरासत में लिए जाने के दौरान मनोज झा ने गांधी जयंती के मौके पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए आत्ममंथन का दिन होना चाहिए और आरोप लगाया कि देश को गांधी के रास्ते से दूर ले जाया जा रहा है।
झा ने कहा कि गांधी जयंती के दिन रास्ते बंद करना और सुरक्षा के कारण मेट्रो स्टेशनों को बंद करना इस बात का संकेत है कि सरकार विरोध से चिंतित है। उनके बयान में गांधी और गोडसे की विचारधाराओं का संदर्भ भी आया। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी थी, जिसे उन्होंने प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में रखा।

प्रदर्शन की मुख्य वजह क्या है?
प्रदर्शन के आयोजकों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के दौरान मतदाता सूचियों में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। आयोजकों का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जिनका वोट देने का अधिकार बना रहना चाहिए।
हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में गलत काम किए जाने के आरोपों को खारिज किया है और अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के तहत किए जाने की बात कही है।
बीजेपी ने EVM और SIR को लेकर किया पलटवार
प्रदर्शन पर बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर विपक्ष चुनाव आयोग और EVM पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन हार के बाद इन्हीं संस्थाओं और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं।
उन्होंने कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में विपक्षी दलों की चुनावी जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि उन मौकों पर चुनाव आयोग को लेकर ऐसी आपत्तियां नहीं उठाई गईं। उन्होंने रायबरेली और वायनाड के चुनाव परिणामों का भी उल्लेख किया और SIR, EVM तथा चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए।
यह बीजेपी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; विपक्ष की ओर से SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियां अलग राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय हैं।
दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?
प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई थी। पुलिस ने बैरिकेडिंग की और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। कई स्थानों पर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया।
पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की आशंका के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस सूत्रों ने संभावित भीड़ का अनुमान करीब 3,000 से 4,000 लोगों का लगाया था।
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बढ़ती बहस
जंतर-मंतर का प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक बहस है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी समूह चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को नियमों के तहत संचालित किए जाने की बात कह रहा है।
गांधी जयंती पर जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया। मनोज झा के बयान और बीजेपी के पलटवार ने इस विवाद को और राजनीतिक धार दी है। आगे इस मामले में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की आपत्तियां दोनों महत्वपूर्ण रहेंगी।
